मंगलवार, 22 मई 2018

UGCNET/JRF में हिन्दी साहित्यकारों आदि के कथनों\गद्य\पद्य पंक्तियों पर पूछे गए प्रश्न-3

61. 'काम मंगल से मंडित श्रेय
सर्ग इच्छा का है परिणाम,
तिरस्कृत कर उसको तुम भूल
बनाते हो असफल भवधाम।'
उपर्युक्त काव्य-पंक्तियां 'कामायनी' के किस सर्ग की हैं \
(1) वासना (2) काम (3) श्रद्धा (4) लज्जा
61. (3) श्रद्धा

62. 'सूरदास जब अपने प्रिय विषय का वर्णन शुरू करते हैं तो मानो अलंकारशास्त्र हाथ जोड़कर उनके पीछे-पीछे दौड़ा करता है। उपमाओं की बाढ़ आ जाती है, रूपकों की वर्षा होने लगती है।'
उपर्युक्त कथन किस आलोचक है౼
(1) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी (2) रामचन्द्र शुक्ल
(3) नन्ददुलारे वाजपेयी (4) हरबंशलाल शर्मा
62. (1) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी

63. 'रैण गंवाई सोइ के दिवस गवाँइयाँ खाई।
हीरे जैसे जनमुह है, कउड़ी बदले जाई।।' ౼ये काव्य-पंक्तियाँ किस कवि की हैं \
(1) कबीरदास (2) दादूदयाल
(3) गुरु नानक (4) कुम्भनदास
63. (3) गुरु नानक

64. 'गुन निरगुन कहियत नहीं जाके'౼ किस कवि की पंक्ति है \
(1) कबीर (2) नानक
(2) दादू (4) रैदास
64. (4) रैदास

65. 'कालदर्शी भक्त कवि जनता के हृदय को सम्भालने और लीन रखने के लिए दबी हुई भक्ति को जगाने लगे। क्रमशः भक्ति का प्रवाह ऐसा विकसित और प्रबल होता गया कि उसकी लपेट में केवल हिन्दू जनता ही नहीं आई, देश में बसने वाले सहृदय मुसलमानों में से भी न जाने कितने आ गए।' ౼ यह कथन किस आलोचक का है \
(1) रामविलास शर्मा (2) रामचन्द्र शुक्ल
(3) हजारीप्रसाद द्विवेदी (4) नगेन्द्र
65. (2) रामचन्द्र शुक्ल

66. 'सोहैं धनश्याम मग हेरति हथेरी ओट
ऊँचे धात बाम चढ़ि आवत उतरी जात।' ౼इन पंक्तियों में नायिका की किस मनोदशा का वर्णन हुआ है\
(1) उल्लास (2) उत्कंठा
(3) हताशा (4) आह्लाद
66. (2) उत्कंठा

67. 'रीतिकाल' में 'लला' के ललाट पर महावर दिखाई पड़ने लगी। 'बीर' सखी हो गया। रणात्मक ध्वनियों की बहार आ गई। 'नाद योजना' से मादकता को बढ़ा वा मिला।౼ यह कथन किसका है \
(1) रामचन्द्र शुक्ल (2) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
(3) जगदीश गुप्त (4) बच्चन सिंह
67. (3) जगदीश गुप्त

68. 'बानी को सार बखान्यो सिंगार
सिंगार को सार किसो-किसोरी।' ౼उक्त पंक्तियाँ किसकी हैं \
(1) आलम (2) देव (3) रसलीन (4) कृपाराम
68. (3) रसलीन

69. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को उनके कवियों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(1) हे मेरी तुम! आओ बैठें पास-पास
हम हास और परिहास करें (i) धूमिल
(2) और वह सुरक्षित नहीं है
जिसका नाम हत्यारों की सूची में नहीं है (ii) नागार्जुन
(3) साम्यवाद के पथ में लीद किया करते हैं
मानवता का पोस्टर देखा लगे रेंकने (iii) केदारनाथ अग्रवाल
(4) कर गई चाक तिमिर का सीना
जीत की फांक यह तुम थीं (iv) त्रिलोचन
(v) लक्ष्मीकान्त वर्मा
कोड :
(a) (b) (c) (d)
(1) (i) (iii) (ii) (iv)
(2) (iii) (i) (iv) (ii)
(3) (i) (ii) (iii) (iv)
(4) (iv) (iii) (ii) (i)
69. (2)
(1) हे मेरी तुम! आओ बैठें पास-पास
हम हास और परिहास करें केदारनाथ अग्रवाल
(2) और वह सुरक्षित नहीं है
जिसका नाम हत्यारों की सूची में नहीं है धूमिल
(3) साम्यवाद के पथ में लीद किया करते हैं
मानवता का पोस्टर देखा लगे रेंकने त्रिलोचन
(4) कर गई चाक तिमिर का सीना
जीत की फांक यह तुम थीं नागार्जुन

70. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को उनकs कवियों कs साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(1) जीवन तेरा छुद्र अंश है व्यक्त नील घन माला में
सौदामिनी संधि-सा सुन्दर क्षणभर रहा उजाला में। (i) पंत
(1) जो सोए सपनों के तम में वे जागेंगे यह सत्य बात (ii) निराला
(2) बांधो न नाव इस ठांव बन्धु
पूछेगा सारा गांव बन्धु (iii) महादेवी वर्मा
(3) पंथ होने दो अपरिचित
प्राण रहने दो अकेला (iv) प्रसाद
(v) भगवतीचरण वर्मा
कोड :
(a) (b) (c) (d)
(1) (i) (ii) (iii) (iv)
(2) (iii) (v) (ii) (i)
(3) (ii) (iii) (iv) (v)
(4) (iv) (v) (iii) (ii)
70. (2)
(1) जीवन तेरा छुद्र अंश है व्यक्त नील घन माला में
सौदामिनी संधि-सा सुन्दर क्षणभर रहा उजाला में। महादेवी वर्मा
(2) जो सोए सपनों के तम में वे जागेंगे यह सत्य बात भगवतीचरण वर्मा
(3) बांधो न नाव इस ठांव बन्धु
पूछेगा सारा गांव बन्धु निराला
(4) पंथ होने दो अपरिचित
प्राण रहने दो अकेला पंत

71. भारतेन्दु की नाट्य-उक्तियों को उनके नाटकों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(1) प्यारी! वे अधर्म्म से लड़ें, हम तो अधर्म्म नहीं कर सकते
हम आर्यवंशी लोग धर्म्म छोड़कर लड़ना क्या जानें। (i) अंधेर नगरी
(2) कोऊ नहिं पकरत मेरो हाथ
बीस कोटि सूत होत फिरत मैं हा हा होय अनाथ। (ii) विषस्य विषमौषधम
(3) चना हाकिम सब जो खाते।
सब पर दूना टिकस लगाते।। (iii) सत्य हरिश्चन्द्र
(4) हमने माना कि उसको स्वर्ग लेने की इच्छा न हो तथापि
अपने कर्मों से वह स्वर्ग का अधिकारी तो हो जाएगा। (iv) नीलदेवी (v) भारत दुर्दशा
कोड :
(a) (b) (c) (d)
(1) (iv) (iii) (ii) (v)
(2) (iv) (v) (i) (iii)
(3) (i) (ii) (iv) (v)
(4) (ii) (v) (iii) (i)
71. (2)
(1) प्यारी! वे अधर्म्म से लड़ें, हम तो अधर्म्म नहीं कर सकते
हम आर्यवंशी लोग धर्म्म छोड़कर लड़ना क्या जानें। नीलदेवी
(2) कोऊ नहिं पकरत मेरो हाथ
बीस कोटि सूत होत फिरत मैं हा हा होय अनाथ। भारत दुर्दशा
(3) चना हाकिम सब जो खाते।
सब पर दूना टिकस लगाते।। अंधेर नगरी
(4) हमने माना कि उसको स्वर्ग लेने की इच्छा न हो तथापि
अपने कर्मों से वह स्वर्ग का अधिकारी तो हो जाएगा। सत्य हरिश्चन्द्र
72. 'गोस्वामी के प्रादुर्भाव को हिन्दी काव्य क्षेत्र में एक चमत्कार समझना चाहिए।' ౼यह कथन किस आलोचक का है \
(1) रामविलास शर्मा (2) रामचन्द्र शुक्ल
(3) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी (4) नन्ददुलारे वाजपेयी
(2) रामचन्द्र शुक्ल

73. अपना परिचय देते हुए किस कवि ने स्वीकार किया है कि౼
‘‘हय, रथ पालकी, गयंद, ग्राम, चारु
आखर लगाय लेत लाखन की सामा हौं।’’ ౼
(1) भूषण (2) देव
(3) प्रतापसाहि (4) पद्माकर
73. (4) पद्माकर

74. 'तिय सैसव जोबन मिले, भेद न जान्यो जात।
परात समय निसि द्यौस के दुवौ भाव दरसात।'
౼उक्त दोहे में नायिका की किस अवस्था का वर्णन हुआ है \
(1) वयःसंधि (2) युवावस्था
(3) प्रौढ़ावस्था (4) शैशवावस्था
74. (1) वयःसंधि

75. 'समरस थे जड़ या चेतन
सुन्दर साकार बना था
चेतनता एक विलसती
आनन्द अखंड घना था।'
౼जयशंकर प्रसाद की उपर्युक्त पंक्तियां 'कामायनी' के किस सर्ग की हैं \
(1) श्रद्धा (2) रहस्य
(3) आनन्द (4) इड़ा
75. (3) आनन्द

76. 'वाक्य रसात्मकं काव्यं ।' ౼किसकी उक्ति है \
(1) रुद्रट (2) विश्वनाथ
(3) वामन (4) कुन्तक
76. (2) विश्वनाथ

77. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को उनकs रचनाकारों कs साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(1) पराधीन रहकर अपना सुख शोक न कह
सकता है। वह अपमान जगत में केवल पशु ही सह सकता है।
(i) मैथिलीशरण गुप्त
(2) धरती हिलकर नींद भगा दे।
वज्रनाद से व्योम जगा दे।
देव, और कुछ लाग लगा दें (ii) जगन्नाथदास 'रत्नाकर'
(3) दिवस का अवसान समीप था
गगन था कुछ लोहित हो चला। (iii) नाथूराम शर्मा शंकर
(4) भेजे मनभावन के उद्धव के आवन की
सुधि ब्रज-गांवनि में पावन जबै लगी। (iv) रामनरेश त्रिपाठी
(v) अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
कोड :
(a) (b) (c) (d)
(1) (iv) (i) (v) (ii)
(2) (i) (iii) (ii) (iv)
(3) (v) (i) (iii) (ii)
(4) (ii) (v) (iv) (iii)
77. (1)
(1) पराधीन रहकर अपना सुख शोक न कह
सकता है। वह अपमान जगत में केवल पशु ही सह सकता है।
रामनरेश त्रिपाठी
(2) धरती हिलकर नींद भगा दे।
वज्रनाद से व्योम जगा दे।
देव, और कुछ लाग लगा दें मैथिलीशरण गुप्त
(3) दिवस का अवसान समीप था
गगन था कुछ लोहित हो चला। अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
(4) भेजे मनभावन के उद्धव के आवन की
सुधि ब्रज-गांवनि में पावन जबै लगी। जगन्नाथदास 'रत्नाकर

78. जयशंकर प्रसाद कs नाट्यगीतों को उनकs नाटकों कs साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(1) आह वेदना मिली विदाई
मैंने भ्रमवश जीवन संचित
मधुकरियों की भीख लुटाई (i) अजातशत्रु
(2) यौवन तेरी चंचल छाया
इसमें बैठ घूंट भर पी लूं जो रस तू है लाया। (ii) ध्रुवस्वामिनी
(3) कैसी कड़ी रूप की ज्वाला
पड़ता है पतंग-सा इसमें मन हो कर मतवाला (iii) स्कन्दगुप्त
(4) स्वर्ग है नहीं दूसरा और
सज्जन हृदय परम करुणामय यही एक है ठौर। (iv) कामना (v) चन्द्रगुप्त
कोड :
(a) (b) (c) (d)
(1) (ii) (v) (i) (iii)
(2) (iv) (iii) (v) (ii)
(3) (v) (i) (ii) (iii)
(4) (iii) (v) (iv) (i)
78. (4)
(1) आह वेदना मिली विदाई
मैंने भ्रमवश जीवन संचित
मधुकरियों की भीख लुटाई स्कन्दगुप्त
(2) यौवन तेरी चंचल छाया
इसमें बैठ घूंट भर पी लूं जो रस तू है लाया। चन्द्रगुप्त
(3) कैसी कड़ी रूप की ज्वाला
पड़ता है पतंग-सा इसमें मन हो कर मतवाला कामना
(4) स्वर्ग है नहीं दूसरा और
सज्जन हृदय परम करुणामय यही एक है ठौर। अजातशत्रु

79. 'भक्तिमार्ग के साधकों के पद, राम-भक्त या वैधी भक्तिमार्ग के उपासकों की कविताएँ, सूफ़ी साधना से पुष्ट मुसलमान कवियों के तथा ऐतिहासिक हिन्दू कवियों के रोमांस और रीति-काव्य ये छहों धाराएँ अपभ्रंश कविता का स्वाभाविक विकास है।' ౼यह कथन किसका है \
(1) रामचन्द्र शुक्ल (2) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
(3) रामविलास शर्मा (4) राहुल सांकृत्यायन
79. (2) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी

80. 'यह सूचित करने की आवश्यकता नहीं है कि न तो सूर का अवधी पर अधिकार था और न जायसी का ब्रजभाषा पर ।'౼ यह कथन किसका है \
(1) हज़ारीप्रसाद द्विवेदी (2) नगेन्द्र
(3) रामचन्द्र शुक्ल (4) रामकुमार वर्मा
80. (3) रामचन्द्र शुक्ल

81. गिरा अरथ, जल बीचि सम कहियत भिन्न भिन्न।
बंदौं सीमाराम पद जिनहि परम परम प्रिय खिन्न।
उक्त काब्य पंक्तियाँ किस कवि की है \
(1) केशवदास (2) तुलसीदास
(3) ईश्वरदास (4) नागरीदास
81. (2) तुलसीदास

82. 'धर्म का प्रवाह कर्म, ज्ञान और भक्ति, इन तीन धाराओं में चलता है। इन तीनों के सामंजस्य से धर्म अपनी पूर्ण सजीव दशा से रहता है। किसी एक के भी अभाव से वह विकलांग रहता है।' ౼यह कथन किस आलोचक का है \
(1) रामचन्द्र शुक्ल (2) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
(3) राहुल सांकृत्यान (4) रामविलास शर्मा
82. (1) रामचन्द्र शुक्ल

83. 'चिरजीवों जारी जुरैं क्यों न सनेह गंभीर ।
को घटि ये वृषभानुजा वे हलधर के बीर ।।'
'वृषभानुजा' और 'हलधर' में कौन-सा अलंकार है \
(1) यमक (2) प्रतीप
(3) श्लेष (4) ब्याजस्तुति
83. (3) श्लेष

84. 'पानिप अपार घन आनंद उकति ओछी
जतन जुगति जोन्ह कौन पै नपति है ।'
उक्त काव्यांश में कवि क्या कहना चाहता है \
(1) नायिका का सौन्दर्य वर्णन असंभव नहीं है।
(2) नायिका के सौन्दर्य से अच्छी कवि की उक्ति है।
(3) नायिका के सौन्दर्य की तुलना में मेरी उक्ति निष्कृष्ट है।
(4) नायिका का सौन्दर्य और कवि की उक्ति दोनों अच्छे हैं।
84. (3) नायिका के सौन्दर्य की तुलना में मेरी उक्ति निष्कृष्ट है।

85. 'अष्टछाप में सूरदास के पीछे इन्हीं का नाम लेना पडझ्ता है। इनकी रचना भी बड़ी सरस और मधुर है। इनके संबंध में यह कहावत प्रसिद्ध है कि और कवि गढ़िया नंददास जड़िया।' ౼यह कथन किसका है ?
(1) रामचन्द्र शुक्ल (2) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
(3) रामकुमार (4) नन्ददुलारे वाजपेयी
85. (1) रामचन्द्र शुक्ल

86. 'छोड़ द्रुमों की मृदु छाया
तोड़ प्रकृति से भी माया
बोलो! तेरे बाल-जाल में कैसे उलझा दूँ लोचन ?'౼यह काव्य-पंक्तियाँ किस कवि की हैं ?
(1) रामनरेश त्रिपाठी (2) जयशंकर प्रसाद
(3) सुमित्रानंदन पंत (4) सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
86. (3) सुमित्रानंदन पंत

87. 'अब तक क्या किया,
जीवन क्या जिया,
ज़्यादा लिया और दिया बहुत-बहुत कम'
उपर्युक्त पंक्तियाँ के रचयिता हैं :
(1) अज्ञेय (2) रघुवीर सहाय
(3) शमशेर बहादुर सिंह (4) मुक्तिबोध
87. (4) मुक्तिबोध

88. 'मौन भी अभिव्यंजना है :
जितना तुम्हारा सच है
उतना ही कहो।'
'मौन' के इस रचनात्मक संदर्भ की अभिव्यक्ति अज्ञेय ने अपनी किस काव्य कृति में की है ?
(1) इंद्रधनुष रौंदे हुए (2) पहले सन्नाटा बुनता हूँ
(3) आँगन के पार द्वार (4) हरी घास पर क्षण भर
88. (1) इंद्रधनुष रौंदे हुए

89. 'कविता कवि व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति नहीं, व्यक्तित्च से पलायन है।’ ౼यह कथन किसका है ?
(1) लुकाच (2) कॉलरिज
(3) आई॰ ए॰ रिचर्ड्स (4) टी॰ एस॰ इलियट
89. (4) टी॰ एस॰ इलियट

90. 'श्रेष्ठ कविता प्रबल मनोवेगों का सहज उच्छलन है, किन्तु इसके पीछे कवि की विचारशीलता और गहन चिन्तन होना चाहिए।’ यह विचार किस पाश्चात्य चिन्तक का है ?
(1) कॉलरिज (2) क्रोचे
(3) लेविस (4) वर्ड्सवर्थ
90. (4) वर्ड्सवर्थ
Hindi Sahitya Vimarsh
UGCNET/JRF/SLET/PGT
हिन्दी भाषा एवं साहित्य के परीक्षार्थियों के लिए सर्वोत्तम मार्गदर्शक
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सम्पादक : मुहम्मद इलियास हुसैन
सहायक सम्पादक : शाहिद इलियास

शनिवार, 19 मई 2018

UGCNET/JRF में हिन्दी भाषा एवं साहित्य की कृतियोँ एवं उनके पात्रों पर पूछे गए प्रश्न-1


UGCNET/JRF में हिन्दी भाषा एवं साहित्य की कृतियोँ एवं उनके पात्रों पर पूछे गए प्रश्न-1

1. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को उनके कवियों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) मालविका (i) सूर्यमुख
(B) मल्लिका (ii) देहान्तर
(C) वेणुरति (iii) चन्द्रगुप्त
(D) देवयानी (iv) शस्त्रा संतान (v) आषाढ़ का एक दिन
कोड :
a b c d
(A) (iii) (v) (i) (ii)
(B) (iii) (i) (ii) (iv)
(C) (ii) (iii) (iv) (v)
(D) (iv) (iii) (ii) (i)
24. (A)
(A) मालविका चन्द्रगुप्त (प्रसाद, 1928 ई.)
(B) मल्लिका आषाढ़ का एक दिन (मोहन राकेश, 1958 ई.)
(C) वेणुरति देहान्तर (नन्दकिशोर आचार्य, 1987 ई.)
(D) देवयानी सूर्यमुख (लक्ष्मीनारायण लाल, 1968 ई.)

2. निम्नलिखित नाटकों के साथ उनके पात्रों को सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) अन्धेर नगरी (i) चाणक्य
( (B) कोर्ट मार्शल (ii) सुरेखा
( (C) द्रोपदी (iii) रामचन्दर
( (D) कौमुदी महोत्सव (iv) नारायणदास
(v) मातृगुप्त
कूट :
aa b c d
(A) v i iii iv
(B) ii iii i v
(C) iv iii ii i
(D) iii ii iv i
2. (C)
(A) अन्धेर नगरी नारायणदास
(B) कोर्ट मार्शल रामचन्दर
(C) द्रोपदी सुरेखा
(D) कौमुदी महोत्सव चाणक्य

3. निम्नलिखित पात्रों को नाट्य कृतियों से सुमेलित कीजिए :
(A) स्कन्दगुप्त (i) विशु
(B) कोणार्क (ii) विलोम
(C) आषाढ़ का दिन (iii) प्रपंचबुद्धि
(D) सूर्य की पहली किरण से अन्तिम किरण (iv) शीलवती (v) दाण्ड्यायन
कूट :
a b c d
(A) (iv) (i) (iii) (ii)
(B) (ii) (iii) (i) (iv)
(C) (iii) (i) (ii) (iv)
(D) (v) (iv) (ii) (ii)
3. (C)
(A) स्कन्दगुप्त प्रपंचबुद्धि
(B) कोणार्क विशु
(C) आषाढ़ का दिन विलोम
(D) सूर्य की पहली किरण से अन्तिम किरण शीलवती

4. निम्नलिखित पात्रों को उनके नाटकों के साथ सुमेलित कीजिए :
(A) मल्लिका (i) देहान्तर
(B) देवसेना (ii) आषाढ़ का एक दिन
(C) शीलवती (iii) स्कन्दगुप्त
(D) शर्मिष्ठा (iv) कोमल गांधार
(v) सूर्य की अन्तिम किरण से सूर्य की पहली किरण तक
कोड :
(a) (b) (c) (d)
(A) (iii) (iv) (i) (ii)
(B) (v) (ii) (iii) (ii)
(C) (ii) (iii) (v) (i)
(D) (ii) (i) (iv) (iii)
4. (C)
(A) मल्लिका (आषाढ़ का एक दिन)
(B) देवसेना (स्कन्दगुप्त)
(C) शीलवती (सूर्य की अन्तिम किरण से सूर्य की पहली किरण तक)
(D) शर्मिष्ठा (देहान्तर)

5. ’नाच्यौ बहुत गोपाल’ की नायिका है :
(A) मृणालिनी (B) बुधिया
(C) निर्गुनिया (D) सिलिया
^ 5. (C) निर्गुनिया

6. निम्नलिखित उपन्यासों को उनके पात्रों के साथ सुमेलित कीजिए :
(A) ग़वन (i) मृणाल
(B) नदी के द्वीप (ii) डॉ॰ प्रशान्त
(C) मैला आंचल (iii) जालपा
(D) बाणभट्ट की आत्मकथा (iv) भुवन (v) निपुणिका
कोड :
( a) (b) (c) (d)
(A) (iii) (iv) (ii) (v)
(B) (v) (ii) (iii) (ii)
(C) (iv) (ii) (v) (ii)
(D) (ii) (i) (iv) (iii)
6. (A)
(A) ग़वन जालपा
(B) नदी के द्वीप भुवन
(C) मैला आंचल डॉ॰ प्रशान्त
(D) बाणभट्ट की आत्मकथा निपुणिका

7. इन चरित्रों को उनके नाटकों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) सुन्दरी (i) चन्द्रगुप्त
(B) कल्याणी़ (ii) देहान्तर
(C) उर्वी (iii) शकुन्तला की अंगूठी
(D) कनक (iv) लहरों के राजहंस (V) पहला राजा
कूट :
aa b c d
(A) (iv) (i) (iii) (v)
(B) (v) (iii) (iv) (i)
(C) (ii) (v) (ii) (iii)
(D) (i) (ii) (iv) (iii)
7. (A)
(A) सुन्दरी (लहरों के राजहंस)
(B) कल्याणी़ (चन्द्रगुप्त)
(C) उर्वी (शकुन्तला की अंगूठी)
(D) कनक (पहला राजा)

8. निम्नलिखित पात्रों को उनके नाटकों के साथ सुमेलित कीजिए :
(A) सिंहरण (i) आधे-अधूरे
(B) युयुत्सु (ii) हानूश
(C) जुनेजा (iii) चन्द्रगुप्त
(D) दक्ष (iv) अंधायुग (v) एक कंठ विषपायी
कोड :
(a) (b) (c) (d)
(A) (iii) (iv) (ii) (v)
(B) (v) (ii) (iii) (ii)
(C) (iii) (iv) (i) (v)
(D) (ii) (i) (iv) (iii)
8. (C)
(A) सिंहरण चन्द्रगुप्त
(B) युयुत्सु अंधायुग
(C) जुनेजा आधे-अधूरे
(D) दक्ष एक कंठ विषपायी

9. ’सुचरिता’ का संबंध किस उपन्यास से है :
(A) शेखर : एक जीवनी (B) वाणभट्ट की आत्मकथा
(C) रागदरबारी (D) पहला गिरमिटिया
9. (B) वाणभट्ट की आत्मकथा

10. निम्नलिखित पात्रों को उनके उपन्यासों के साथ सुमेलित कीजिए :
(A) गोबर (i) नदी के द्वीप
(B) भुवन (ii) वाणभट्ट की आत्मकथा
(C) महामाया (iii) मृगनयनी
(D) कुमारगिरि (iv) गोदान (v) चित्रालेखा
कोड :
(a) (b) (c) (d)
(A) (iv) (i) (ii) (v)
(B) (iii) (ii) (i) (iv)
(C) (iv) (ii) (v) (i)
(D) (i) (iii) (v) (ii)
10. (A)
(A) गोबर गोदान
(B) भुवन नदी के द्वीप
(C) महामाया वाणभट्ट की आत्मकथा
(D) कुमारगिरि चित्रालेखा

11. निम्नलिखित पात्रों को उनके काव्यों के साथ सुमेलित कीजिए :
(A) प्रियंवद (i) प्रलय की छाया
(B) कमला (ii) उर्वशी
(C) औशीनरी (iii) आत्मजयी
(D) नचिकेता (iv) असाध्य वीणा (v) अंधायुग
कोड :
(a) (b) (c) (d)
(A) (iv) (i) (ii) (v)
(B) (iv) (i) (ii) (iii)
(C) (iv) (ii) (v) (i)
(D) (i) (iii) (v) (ii)
11. (B)
(A) प्रियंवद असाध्य वीणा
(B) कमला प्रलय की छाया
(C) औशीनरी उर्वशी
(D) नचिकेता आत्मजयी

12. राजमती इनसे से किस काव्य-कृति की नायिका है :
(A) कीर्तिपताका (B) आल्हखंड
(C) बीसलदेव रासो (D) रणमल्ल छंद
12. (C) बीसलदेव रासो

13. निम्नलिखित पात्रों को उनके नाटकों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(1) पर्णदत्त (i) सूर्य की अन्तिम किरण से सूर्य की पहली किरण तक
(2) हेरूप (ii) स्कन्दगुप्त
(3) ओक्काक (iii) माधवी
(4) गालव (iv) कलंकी (v) नरसिंह कथा
कोड :
(a) (b) (c) (d)
(1) (ii) (iii) (iv) (v)
(2) (iii) (i) (iv) (ii)
(3) (i) (iv) (v) (iii)
(4) (ii) (iv) (i) (iii)
13. (4)
(1) पर्णदत्त स्कन्दगुप्त
(2) हेरूप कलंकी
(3) ओक्काक सूर्य की अन्तिम किरण से सूर्य की पहली किरण तक
(4) गालव माधवी

14. निम्नलिखित पात्रों को संबंद्ध काव्य-ग्रंथों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(1) चंदा (i) बीसलदेव रासो
(2) नागमती (ii) चंदायन
(3) राजमती (iii) ढोला-मारू रा दूहा
(4) मालवणी (iv) पृथ्वीराज रासो
(v) पदमावत
कोड :
(a) (b) (c) (d)
(1) (ii) (v) (i) (iii)
(2) (iv) (iii) (v) (ii)
(3) (v) (i) (ii) (iii)
(4) (ii) (v) (iv) (i)
14. (1)
(1) चंदा चंदायन
(2) नागमती पदमावत
(3) राजमती बीसलदेव रासो
(4) मालवणी ढोला-मारू रा दूहा

15. निम्नलिखित पात्रों को रचनाओं के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-2 सूची-2
(1) राधा (i) राम की शक्तिपूजा
(2) जाम्बवान (ii) असाध्य वीणा
(3) युधिष्ठिर (iii) प्रियप्रवास
(4) केशकंबली (iv) विजय पथ (v) महाप्रस्थान
कोड :
(a) (b) (c) (d)
(1) (i) (ii) (iii) (iv)
(2) (iii) (i) (v) (ii)
(3) (ii) (i) (ii) (iv)
(4) (v) (i) (ii) (iii)
15. (2)
(1) राधा प्रियप्रवास
(2) जाम्बवान राम की शक्तिपूजा
(3) युधिष्ठिर महाप्रस्थान
(4) केशकंबली असाध्य वीणा

16. निम्नलिखित स्त्री चरित्रों को संबंधित नाटकों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(1) शीलवती (i) पहला राजा
(2) शर्मिष्ठा (ii) द्रौपदी
(3) सुरेखा (iii) सूर्य की अंतिम किरण से सूर्य की पहली किरण तक
(4) उर्वी (iv) देवयानी का कहना है (v) देहान्तर
कोड :
(a) (b) (c) (d)
(1) (i) (ii) (iii) (iv)
(2) (iii) (v) (ii) (i)
(3) (ii) (iii) (iv) (v)
(4) (iv) (v) (iii) (ii)
16. (2)
(1) शीलवती सूर्य की अंतिम किरण से सूर्य की पहली किरण तक
(2) शर्मिष्ठा देहान्तर
(3) सुरेखा द्रौपदी
(4) उर्वी पहला राजा

17. ^’अनन्तदेवी’ जयशंकर प्रसाद के किस नाटक के की पात्रा है :
(1) ध्रुवस्वामिनी (2) राज्यश्री (3) अजातशत्रु (4) स्कन्दगुप्त
17. (4) स्कन्दगुप्त

18. फणीश्वरनाथ रेणु द्वारा रचित कहानी ‘ठेस’ का नायक है :
(1) सिरचन (2) घीसू (3) शेख जुम्मन (4) रामा
18. (1) सिरचन

19. अरुण और मधूलिका किस कहानी के पात्र हैं :
(1) चित्तौड़ का उद्धार (2) अशोक (3) आकाशदीप (4) पुरस्कार
19. (4) पुरस्कार

20. निम्नलिखित पात्रों को संबंधित रचनाओं के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(1) आकुलि किलात (i) रश्मिरथी
(2) अश्वसेन (ii) उर्वशी
(3) युयुत्सु (iii) कामायनी
(4) औशीनरी (iv) वैदेही बनवास
(v) अंधायुग
कोड :
(a) (b) (c) (d)
(1) (i) (ii) (iii) (v)
(2) (iii) (iii) (v) (ii)
(3) (iii) (i) (v) (ii)
(4) (iv) (v) (ii) (iii)
20. (3) (
(1) आकुलि किलात कामायनी
(2) अश्वसेन रश्मिरथी
(3) युयुत्सु अंधायुग
(4) औशीनरी उर्वशी

21. निम्नलिखित स्त्राी चरित्रों को संबंधित नाटकों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(1) विलोम (i) माधवी
(2) गालव (ii) मिस्टर अभिमन्यु
(3) आत्मन (iii) देहान्तर
(4) पृथु (iv) आषाढ़ का एक दिन
(v) पहला राजा
कोड :%
(a) (b) (c) (d)
(1) (iii) (ii) (i) (iv)
(2) (iv) (i) (ii) (v)
(3) (ii) (iii) (iv) (i)
(4) (ii) (iv) (v) (iii)
21. (2) (a
(1) विलोम आषाढ़ का एक दिन
(2) गालव माधवी
(3) आत्मन मिस्टर अभिमन्यु
(4) पृथु देहान्तर

22. निम्नलिखित पात्रों को उनकी कहानियों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(1) अलोपीदीन (i) ईदगाह
(3) झुरिया (ii) नमक का दारोगा
(3) जोखू (iii) सद्गति
(4) अमीना (iv) गुल्ली-डंडा
(v) ठाकुर का कुआं
कोड :
(a) (b) (c) (d)
(1) (ii) (iii) (v) (i)
(2) (i) (ii) (iii) (iv)
(3) (iii) (i) (iv) (v)
(4) (v) (iv) (i) (ii)
22. (1)
(1) अलोपीदीन नमक का दारोगा
(3) झुरिया सद्गति
(3) जोखू ठाकुर का कुआं
(4) अमीना ईदगाह

23. ’सुजान कुमार’ किस सूफ़ी प्रेमाख्यान का नायक है :
(A) मधुमालती (B) चित्रावली (C) इन्द्रावती (D) हंसजवाहिर
23. (B) चित्रावली

24. निम्नलिखित पात्रों को उनके उपन्यासों के साथ सुमेलित कीजिए :
(A) रेखा (i) मैला आंचल
(B) नीलिमा (ii) वे दिन
(C) कमला (iii) आवाँ
(D) रायना (iv) नदी के द्वीप (v) अंधेरे बन्द कमरे
कूट :
a b c d
(A) (i) (iii) (ii) (i)
(B) (iv) (v) (i) (ii)
(C) (iv) (iii) (ii) (ii)
(D) (v) (ii) (i) (iv)
1. (B)
(A) रेखा नदी के द्वीप
(B) नीलिमा अंधेरे बन्द कमरे
(C) कमला मैला आंचल
(D) रायना वे दिन

25. निम्नलिखित पात्रों को उनसे संबंद्ध काव्यों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(1) कैमास (i) आल्हखंड
(2) परमाल (ii) कीर्तिलता
(3) राघव चेतन (iii) पृथ्वीराज रासो
(4) इब्राहीम शाह (iv) पउमचरिउ (v) पदमावत
कोड :
(a) (b) (c) (d)
(1) (i) (ii) (iii) (iv)
(2) (iii) (v) (ii) (i)
(3) (ii) (iii) (iv) (v)
(4) (iv) (v) (iii) (ii)
25. (2)
(1) कैमास पृथ्वीराज रासो
(2) परमाल पदमावत
(3) राघव चेतन कीर्तिलता
(4) इब्राहीम शाह आल्हखंड

26. निम्नलिखित औपन्यासिक पात्रों को उनके उपन्यासों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(1) भुवन (i) अपने अपने अजनबी
(2) जोहरा (ii) अनामदास का पोथा
(3) कालीचरन (iii) मैला आंचल
(4) रैक्व (iv) गबन (v) नदी के द्वीप
कोड :
(a) (b) (c) (d)
(1) (v) (ii) (i) (iv)
(2) (i) (ii) (iii) (iv)
(3) (v) (iv) (iii) (ii)
(4) (iv) (v) (i) (iii)
26. (3)
(1) भुवन नदी के द्वीप
(2) जोहरा गबन
(3) कालीचरन मैला आंचल
(4) रैक्व अनामदास का पोथा

27. निम्नलिखित पात्रों को उनके उपन्यासों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(1) बावनदास (i) रागदरबारी
(2) रंगनाथ (ii) आंवा
(3) मंदा (iii) मैला आंचल
(4) नमिता पाण्डे (iv) इदन्नम (v) आधा गांव
कोड :
(a) (b) (c) (d)
(1) (ii) (iii) (iv) (v)
(2) (iii) (i) (iv) (ii)
(3) (i) (iv) (v) (iii)
(4) (v) (iv) (ii) (i)
27. (2)
(1) बावनदास मैला आंचल
(2) रंगनाथ रागदरबारी
(3) मंदा इदन्नम
(4) नमिता पाण्डे आंवा

28. प्रेमचन्द के औपन्यासिक पात्रों को उनके उपन्यासों से सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) अमृतराय (i) निर्मला
(B) कृष्णचन्द्र (ii) सेवासदन
(C) जानसेवक (iii) प्रेमा
(D) उदयभानु (iv) कायाकल्प (v) रंगभूमि
कोड :
(A) (b) (c) (d)
(1) (ii) (iii) (iv) (v)
(2) (iii) (iv) (v) (ii)
(3) (i) (iv) (v) (iii)
(4) (v) (iv) (ii) (i)
28. (2)
(A) अमृतराय प्रेमा
(B) कृष्णचन्द्र कायाकल्प
(C) जानसेवक रंगभूमि
(D) उदयभानु सेवासदन

29. निम्नलिखित पात्रों को उनके काव्यों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(1) यशोदा (i) असाध्य वीणा
(2) शची (ii) प्रियप्रवास
(3) अश्वत्थामा (iii) आत्महत्या के विरुद्ध
(4) केशकम्बली (iv) अंधायुग (v) विष्णप्रिया
कोड :
(a) (b) (c) (d)
(1) (ii) (iv) (v) (iii)
(2) (iii) (i) (iv) (ii)
(3) (i) (iv) (v) (iii)
(4) (v) (iv) (ii) (i)
29. (1)
(1) यशोदा (ii) प्रियप्रवास
(2) शची (v) विष्णप्रिया
(3) अश्वत्थामा (iv) अंधायुग
(4) केशकम्बली (i) असाध्य वीणा

30. निम्नलिखित पात्रों को उनके उपन्यासों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) जालपा (i) (त्यागपत्र)
(B) वर्षा (ii) (परदे की रानी)
(C) मृणालिनी (iii) (अपने अपने अजनबी)
(D) सेल्मा (iv) (गबन)
(v) (मुझे चांद चाहिए)
कूट :
a b c d
(A) (iv) (v) (i) (iii)
(B) (v) (i) (ii) (iv)
(C) (ii) (iv) (v) (i)
(D) (iii) (iv) (ii) (v)
30. (A)
(A) जालपा (गबन)
(B) वर्षा (मुझे चांद चाहिए)
(C) मृणालिनी (त्यागपत्र)
(D) सेल्मा (अपने अपने अजनबी)

31. कालीचरण किस उपन्यास का पात्र है :
(A) परती परिकथा (B) झूठा सच
(C) मैला आंचल (D) गोदान
31. (C) मैला आंचल

32. निम्नलिखित चरित्रों को उनके काव्यों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) मानव (i) अंधायुग
(B) पुरुरवा (ii) कामायनी
(C) युयुत्सु (iii) प्रियप्रवास
(D) राधा (iv) उर्वशी (v) अग्निलीक
कूट :
a b c d
(A) (v) (i) (iii) (ii)
(B) (ii) (iv) (i) (iii)
(C) (ii) (iii) (i) (iv)
(D) (i) (ii) (iii) (iv)
32. (B)
(A) मानव कामायनी
(B) पुरुरवा उर्वशी
(C) युयुत्सु अंधायुग
(D) राधा प्रियप्रवास

33. उपन्यासों का उनके पात्रों के साथ सुमेलन कीजिए :
(A) रंगभूमि (i) मृणाल
(B) झूठा-सच (ii) नीलिमा
(C) त्यागपत्र (iii) योके
(D) अन्धेरे बन्द कमरे (iv) तारा (v) सोफ़िया
कोड :
(a) (b) (c) (d)
(A) (i) (i) (v) (ii)
(B) (iv) (ii) (i) (iii)
(C) (v) (iv) (i) (ii)
(D) (iii) (iv) (v) (ii)
33. (C)
(A) रंगभूमि सोफ़िया
(B) झूठा-सच तारा
(C) त्यागपत्र मृणाल
(D) अन्धेरे बन्द कमरे नीलिमा

34. पात्रों को उनके नाटकों के साथ सुमेलित कीजिए :
(A) देवसेना (i) कोणार्क
(B) विशु (ii) आधे-अधूरे
(C) गांधारी (iii) स्कन्दगुप्त
(D) सावित्री (iv) रातरानी (v) अंधायुग
कोड :
(a) (b) (c) (d)
(A) (iii) (i) (v) (ii)
(B) (v) (ii) (i) (iii)
(C) (ii) (v) (iii) (iv)
(D) (i) (iv) (v) (ii)
34. (A)
(A) देवसेना स्कन्दगुप्त
(B) विशु कोणार्क
(C) गांधारी अंधायुग
(D) सावित्री आधे-अधूरे

35. ’निउनिया’ किस उपन्यास का पात्र है
(A) अनामदास का पोथा (B) चारुचन्द्रलेख
(C) पुनर्नवा (D) बाणभट्ट की आत्मकथा
35. (D) बाणभट्ट की आत्मकथा



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बुधवार, 16 मई 2018

UGC/NET/JRF में पूछे गए कथन/गद्य/पद्य-पंक्तियाँ-1

UGC/NET/JRF में पूछे गए कथन/गद्य/पद्य-पंक्तियाँ-1

1. ‘‘नायिका भेद की संकीर्ण सीमा में जितना लोकचित्त आ सकता था, इस काल (रीति) का उतना चित्र निश्चय ही विश्वसनीय और मनोरम है।’’ ౼यह कथन किसका है?
(1) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी (2) नगेन्द्र
(3) भगीरथ मिश्र (4) शिवकुमार मिश्र
1. (3) भगीरथ मिश्र

2. ‘‘मैंने श्रीकृष्णचन्द्र को इस ग्रंथ में एक महापुरुष की भाँति अंकित किया है, ब्रह्म करके नहीं।’’ ౼यह आख्यान किस कवि ने किया है ?
(1) धर्मवीर भारती (2) द्वारिका प्रसाद मिश्र
(3) मैथिलीशरण गुप्त (4) अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध
2. (4) अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध

3. ‘‘दुख ही जीवन की कथा रही
क्या कहूँ आज जो नहीं कही।’’ ౼यह कथन किस कवि का है ?
(1) प्रसाद (2) मुक्तिबोध
(3) निराला (4) पंत
3. (3) निराला

4. ‘‘भूलकर जब राह, जब जब राह, भटका मैं
तुम्हीं झलके, महाकवि,
सघन तम की आंख बनकर मेरे लिए’’ ౼महाकवि निराला का उपर्युक्त स्तवन किस परवर्ती कवि ने किया है ?
(1) शमशेर बहादुर सिंह (2) रामधारी सिंह दिनकर
(3) धर्मवीर भारती (4) रघुवीर सहाय
(1) शमशेर बहादुर सिंह

5. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) जाके कुटुम्ब सब ढोर ढोबन्त
फिरहिं अजहुं बानारसी आसपासा (i) जायसी
(B) जेई मुख देखा तेइ हँसा
सुना ते आयउ आँसु (ii) सूरदास
(C) हरि हैं राजनीति पढि आए समुझी बात
कहत मधुकर जो समाचार कछु पाए (iii) रैदास
(D) संतन को कहा सीकरी सो काम (iv) नंददास
(v) कुंभनदास
कोड :
(a) (b) (c) (d)
(1) (iv) (v) (i) (ii)
(2) (iii) (iii) (v) (i)
(3) (iii) (i) (ii) (v)
(4) (i) (ii) (iv) (iii)
5. (3)
(A) जाके कुटुम्ब सब ढोर ढोबन्त
फिरहिं अजहुं बानारसी आसपासा ౼रैदास
(B) जेई मुख देखा तेइ हँसा
सुना ते आयउ आँसु ౼जायसी
(C) हरि हैं राजनीति पढि आए समुझी बात
कहत मधुकर जो समाचार कछु पाए ౼सूरदास
(D) संतन को कहा सीकरी सो काम ౼कुंभनदास

6. ‘‘मोरा जोबना नवेल रा भयो है गुलाल
कासे घर दीनी बकस मोरी माल।
उक्त काव्य-पंक्तियां के रचयिता हैं’’
(A) धर्मदास (B) अमीर ख़ुसरो (C) दरिया साहब (D) यारी साहब
6. (B) अमीर ख़ुसरो

7. ‘‘सखी हौं स्याम रंग रंगी।
देखी बिकाय गई वह मूरति, सूरत माहिं पगी ।’’ ౼ये काव्य-पंक्तियां किसकी हैं?
(A) हितहरिवंश (B) गदाधर भट्ट (C) मीराबाई (D) जीव गोस्वामी
7. (B) गदाधर भट्ट

8. ‘‘तिय सैसव जोबन मिले, भेद न जान्यो जात।
प्रात समय निसि द्योस के डुबो भाव दरसात।’’
इस देाहे में नायिका की किस अवस्था का वर्णन किया गया है?
(A) सद्यः स्नाता (B) वयःसंधि (C) नवोढा (D) मानमृदु
8. (B) वयःसंधि

9. ‘‘जगत् जनायो जिहिं सकल, सो हरि जान्यों नाहिं।
ज्यों आंखिन सब देखियै, आंखि न देखी जाहिं।।’’
उक्त दोहे में कौन-सा अलंकार है?
(A) दृष्टान्त (B) उदाहरण (C) उपमा (D) प्रतिवस्तुपमा
9. (B) उदाहरण

10. ‘‘रचना न तो दर्शन है और न किसी ज्ञानी के प्रौढ मस्तिष्क का चमत्कार। यह तो अन्तततः एक साधारण मनुष्य का शंकाकालु हृदय ही है, जो मस्तिष्क के स्तर पर चढकर बोल रहा है।’’ ౼रामधारी सिंह दिनकर द्वारा कहा गया यह कथन किस काव्य में संबंध में है?
(A) रश्मिरथी (B) उर्वशी (C) कुरुक्षेत्र (D) परशुराम की प्रतीक्षा
10. (C) कुरुक्षेत्र

11. ‘‘उड़ गया गरजता यंत्र-गरुड़
बन बिन्दु, शून्य में पिघल गया साँप।’’ ౼ये पंक्तियाँ अज्ञेय की किस कविता से हैं?
(A) पहचान (B) साँप (C) हरि घास पर क्षण भर (D) हवाई अड्डे पर विदा
11. (D) हवाई अड्डे पर विदा

12. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को उनके कवियों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) हौं सब कबिन्ह केर पच्छिलगा। (i) कबीरदास
(B) कबित्त बिवेक एक नहिं मोरे। (ii) जायसी
(C) प्रभुजी, हौं पतितन कौ टीको। (iii) मलूकदास
(D) अब तो अजपा जपु मन मेरे (iv) तुलसीदास (v) सूरदास
कोड :
a b c d
(A) (ii) (iv) (v) (iii)
(B) (iv) (i) (ii) (v)
(C) (iii) (ii) (iv) (i)
(D) (i) (iv) (v) (ii)
12. (A)
(A) हौं सब कबिन्ह केर पच्छिलगा। (जायसी)
(B) कबित्त बिवेक एक नहिं मोरे। (तुलसीदास)
(C) प्रभुजी, हौं पतितन कौ टीको। (सूरदास)
(D) अब तो अजपा जपु मन मेरे। (कबारदास)

13. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को उनके कवियों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) श्रेय नही कुछ मेरा मैं तो डूब गया था स्वयं शून्य में
वीणा के माध्यम से अपने को मैंने सब कुछ सौंप दिया था। (i) मुक्तिबोध
(B) परम अभिव्यक्ति लगातार घूमती है जग में
पता नहीं जाने कहाँ, जाने कहाँ वह है (ii) दिनकर
(C) पर एक तत्व है बीज रूप स्थित मन में साहस में,
स्वतंत्रता में, नूतन सृजन में (iii) शमशेर बहादुर सिंह
(D) मैं उनका आदर्श जो व्यथा न खोल सकेंगे
पूछेगा जग किन्तु पिता का नाम न बोल सकेंगे। (iv) धर्मवीर भारती (v) अज्ञेय
कोड :
a b c d
(A) (iv) (i) (iv) (ii)
(B) (v) (i) (iii) (ii)
(C) (i) (ii) (iii) (iv)
(D) (iv) (iii) (ii) (vi)
13. (B)
(A) श्रेय नही कुछ मेरा मैं तो डूब गया था स्वयं शून्य में
वीणा के माध्यम से अपने को मैंने सब कुछ सौंप दिया था।
(अज्ञेय, असाध्यवीणा)
(B) परम अभिव्यक्ति लगातार घूमती है जग में
पता नहीं जाने कहाँ, जाने कहाँ वह है । (मुक्तिबोध, अन्धेरे में, भाग 8)
(C) पर एक तत्व है बीज रूप स्थित मन में साहस में,
स्वतंत्रता में, नूतन सृजन में (धर्मवीर भारती, अन्धायुग)
(D) मैं उनका आदर्श जो व्यथा न खोल सकेंगे
पूछेगा जग किन्तु पिता का नाम न बोल सकेंगे। (दिनकर, रश्मिरथी)

14. ‘‘मैं नारि अपावन प्रभु जग पावन रावन रिपु जग सुखदाई। राजीव विलोचन भव भय मोचन पाहि-पाहि सरनहिं आई।।’’
౼रामचरित मानस की उक्त चौपाई में व्यक्त विचार किस पात्र के हैं ?
(1) अहल्या (2) शबरी
(3) तारा (4) मंदोदरी
14. (1) अहल्या

15. ‘‘अच्युत् चरन तरंगिगिनी, शिव-सिर मालती माल।
परि न बनायो सुरसरी, कीजो इंजव भाल।’’
౼इस दोहे के रचनाकार का नाम है :
(1) रहीम (2) रसलीन
(3) रसखान (4) रामसहाय
15. (1) रहीम

16. ‘‘लिखन बैठी जाकी सबी गहि-गहि हरब गरूर।
भए न केते जगत के चतुर चितेरे कूर।।’’ ౼इस दोपे में सबी शब्द का अर्थ है :
(1) चित्र (नायिका के समान) (2) काल्पनिक चित्र
(3) आदर्श चित्र (4) मनोनुकूल चित्र
16. (1) चित्र (नायिका के समान)

17. ‘‘कहाँ हो ऐ हमारे प्राण प्यारे। किधर तुम छोड़कर हमको सिधारे।।
बुढ़ापे में यह दुख भी देखना था।। इसको को देखने को मैं बचा था।’’
౼ये काव्य-पंक्तियाँ किस कवि की हैं ?
(1) प्रतापनारायण मिश्र (2) अम्बिकादत्त व्यास
(3) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र (4) उपाध्याय बदरीनारायण चौधरी
17. (3) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

18. ‘‘फिर परियों के बच्चे से हम सुभग सीप के पंख पसार।
समुद्र पैरते शुचि ज्योत्सना में पकड़ इन्द्र के कर सुकुमार।’’
౼इन काव्य-पंक्तियों के रचनाकार हैं :
(1) सुमित्रानन्दन पंत (2) महादेवी वर्मा
(3) निराला (4) प्रसाद
18. (1) सुमित्रानन्दन पंत

19. ‘‘सब का निचोड़ लेकर तुम
सुख से सूखे जीवन में
बरसो प्रभात हिम कण-सा
आँसू बनकर जीवन में।’’
उक्त काव्य-पंक्तियों के रचयिता हैं :
(1) निराला (2) जयशंकर प्रसाद
(3) महादेवी वर्मा (4) पंत
19. (2) जयशंकर प्रसाद

20. ‘‘कहाँ जाऊँ?/हर दिशा में/मृत्यु से भी बहुत आगे की अपरिमित दूरियाँ हैं।’’ ౼कविता की ये पंक्तियाँ कुंवर नारायण की किस रचना से है?
(1) चक्रव्यूह (2) अपने सामने
(3) आत्मजयी (4) परिवेश : हम-तुम
20. (3) आत्मजयी

21. ‘‘वैदिक सूक्तों के गरिमामय उद्गम से लेकर लोकगीतों के महासागर तक जिस अविछिन्न प्रवाह की उपलब्धि होती है, उस भारतीय भावधारा का स्नातक हूँ।’’
उपर्युक्त विचार विद्यानिवास मिश्र ने अपने किस निबंध-संग्रह की भूमिका में लिखे हैं?
(1) देश, धर्म और साहित्य (2) पीपल के बहाने
(3) छितवन की छांह (4) शिरीष की याद आई।
21. (3) छितवन की छांह

22. अज्ञेय ने ‘शेखर’ के संदर्भ में अपने किस निबंध में स्वीकार किया है कि ‘‘ज्याँ क्रिस्तोफ के अनवत आत्मशोध और आत्म-साक्षात्कार का जो चित्र ‘रोलाँ’ ने प्रस्तुत किया है, उससे कुछ अवश्य प्रेरणा मिली ?’’
(1) अद्यतन (2) आत्मनेपद
(3) त्रिशंकु (4) धार और किनारे
22. (2) आत्मनेपद

23. ‘‘आज बस पराजय की बेला में सिद्ध हुआ
झूठी थी सारी अनिवार्यता भविष्य की
केवल कर्म सत्य है
मानव जो करता है, इसी समय
उसी में निहित है भविष्य
युग-युग तक का।’’
౼अंधायुग का उक्त संवाद किस अंक से उद्धृत है ?
(1) कौरव नगरी (2) गांधारी का शाप
(3) प्रभु की मृत्यु (4) पशु का उदय
23. (4) पशु का उदय

24. ‘‘समझदारी आने पर यौवन चला जाता है, जब तक माला गुंथी जाती है फूल कुम्हला जाते हैं।’’
౼जयशंकर प्रसाद कृत ‘चन्द्रगुप्त’ नाटक का उक्त संवाद किस पात्र द्वारा बोला गया है ?
(1) दाण्ड्यायन (2) चाणक्य
(3) चन्द्रगुप्त (4) सिंहरण
24. (2) चाणक्य

25. ‘‘काव्यशोभायाः कर्तारौ धर्मः गुणाः।’’ ౼यह किस आचार्य की उक्ति है ?
(1) मम्मट (2) वामन
(3) आनन्दवर्द्धन (4) विश्वनाथ
25. (2) वामन

26. जहाँ सामानार्थक विशेषणों से प्रस्तुत के वर्णन द्वारा अप्रस्तुत का बोध कराया जाय, वहाँ कौन-सा अलंकार होता है ?
(1) समासोक्ति (2) सहोक्ति
(3) विनोक्ति (4) व्यक्तिरेक
26. (1) समासोक्ति

27. ‘‘मैं साहित्य को मनुष्य की दृष्टि से देखने का पक्षपाती हूँ।’’ ౼यह किस आचार्य की उक्ति है?
(1) महावीर प्रसाद द्विवेदी (2) रामचन्द्र शुक्ल
(3) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी (4) नन्ददुलारे वाजपयी
27. (3) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी

28. स्वाधीनता प्राप्ति के अवसर पर लिखी गई निम्नलिखित कविता किस कवि की है?
‘‘मुक्त गगन है, मुक्त पवन है, मुक्त सांस गर्वीली।
लांघ सात लांबी सदियों को हुई शृंखला ढीली।
टूटी नहीं कि लगा अभी तक, उपनिवेश का दाग़?
बोल तिरंगे, तुझे उड़ाऊँ या कि जगाऊँ आग?’’
(1) माखनलाल चतुर्वेदी (2) रामधारी सिंह दिनकर
(3) बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ (4) सोहनलाल द्विवेदी
28. (1) माखनलाल चतुर्वेदी

29. ‘‘कविता तो कवि की आत्मा का आलोक है, उसके हृदय का रस है, जो बाहर की वस्तु का अवलम्ब लेकर फूट पड़ती है।’’ ౼यह कथन किसका है?
(1) जयशंकर प्रसाद (2) नरेश मेहता
(3) रामधारी सिंह दिनकर (4) कुंवर नारायण
29. (3) रामधारी सिंह दिनकर

30. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-I सूची-II
(a) जेहि पंखी के नियर होई, करै बिरह की बात। सोई पंखी जाई जरि, तरिवर होई निपात (i) तुलसीदास
(b) हमको सपनेहू में सोच जा दिन तें बिछुरे नन्दनन्दन ता दिन ते यह पोच। (ii) नंददास
(d) जब जीवन को है कपि आस न कोय। कनगुरिया की मुदरी कंगना होय (iii) सूरदास
(d) जिभिया ऐसी बावरी कहि गई सरग-पताल आपुहिं कहि भीतर रही, जूती खात कपाल। (iv) जायसी (v) रहीम
कोड :
(a) (b) (c) (d)
(1) (iv) ( iii) ( i) (v)
(2) (v) (iv) (ii) (i)
(3) (iii) (v) (iv) (ii)
(4) (ii) ( i) ( iii) ( iv)
30. (1)
(a) जेहि पंखी के नियर होई, करै बिरह की बात। सोई पंखी जाई जरि, तरिवर होई निपात ౼ जायसी
(b) हमको सपनेहू में सोच जा दिन तें बिछुरे नन्दनन्दन ता दिन ते यह पोच। ౼ सूरदास
(c) जब जीवन को है कपि आस न कोय। कनगुरिया की मुदरी कंगना होय ౼ तुलसीदास
(d) जिभिया ऐसी बावरी कहि गई सरग-पताल आपुहिं कहि भीतर रही, जूती खात कपाल। ౼ रहीम

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UGC/NET/JRF में पूछे गए कथन/गद्य/पद्य-पंक्तियाँ-2


UGC/NET/JRF में पूछे गए कथन/गद्य/पद्य-पंक्तियाँ-2


31. नील परिधान बीच सुकुमार, खिला मृदुल अधखुला अंग
खिला हो ज्यों बिजली का फूल, मेघ वन बीच गुलाबी रंग ।
౼इन पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है ?
(A) उपमा (B) उत्प्रेक्षा (C) रूपक (D) दृष्टान्त
31. (C) रूपक

32. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को सुमेलित कीजिए :
(A) नैया बीच नदिया डूबति जाय (1) रहीम
(B) अजगर करे न चाकरी,पंछी करे न काज (2) कबीर
(C) गुरु सुआ जेइ पंथ दिखावा (3) ख़ुसरो
(D) तबलग ही जीवो भलो देबौ होय न धीम (4) जायसी
(5) मलूकदास
कोड :
a b c d
(A) 5 1 2 3
(B) 2 5 4 1
(C) 2 3 5 1
(D) 2 1 5 4
32. (B)
(A) नैया बीच नदिया डूबति जाय (कबीर)
(B) अजगर करे न चाकरी,पंछी करे न काज (मलूकदास)
(C) गुरु सुआ जेइ पंथ दिखावा (जायसी)
(D) तबलग ही जीवो भलो देबौ होय न धीम (रहीम)

33. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए :
(A) ये उपमान मैले हो गये हैं (i) अज्ञेय
(B) हम राज्य लिये मरते हैं (ii) बिहारी
(C) बतरस लालच लाल की (iii) मैथिलीशरण गुप्त
(D) भक्तिहिं ज्ञानहिं नहिं कछु भेदा (iv) तुलसीदास (v) पंत

कूट :
a b c d
(A) (v) (i) (ii) (iii)
(B) (i) (iii) (ii) (iv)
(C) (i) (ii) (iii) (iv)
(D) (iv) (v) (i) (ii)
33. (B)
(A) ये उपमान मैले हो गये हैं (अज्ञेय)
(B) हम राज्य लिये मरते हैं (मैथिलीशरण गुप्त)
(C) बतरस लालच लाल की (बिहारी)
(D) भक्तिहिं ज्ञानहिं नहिं कछु भेदा (तुलसीदास)

34. निम्नलिखित गद्य-पंक्तियों को उनके लेखकों के साथ सुमेलित कीजिए :
(A) बैर क्रोध का अचार या मुरब्बा है (i) प्रेमचन्द
(B) अधिकार सुख कितना मादक और सारहीन (ii) प्रसाद
(C) निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल (iii) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(D) मर्द साठे पर पाठे होते हैं (iv) रामचन्द्र शुक्ल
(v) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
कूट :
a b c d
(A) (i) (ii) (iii) (iv)
(B) (v) (i) (ii) (iii)
(C) (iv) (ii) (iii) (i)
(D) (i) (iv) (v) (iii)
34. (C)
(A) बैर क्रोध का अचार या मुरब्बा है (रामचन्द्र शुक्ल)
(B) अधिकार सुख कितना मादक और सारहीन (प्रसाद)
(C) निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल (भारतेन्दु हरिश्चन्द्र)
(D) मर्द साठे पर पाठे होते हैं (प्रेमचन्द)

35. ‘‘नैन नचाय कही मुसुकाय, लला फिर आइयो खेलन होरी’’ ౼ये काव्य-पंक्तियां किस कवि की हैं ?
(A) पद्माकर
(B) मतिराम
(C) घनानन्द
(D) देव
35. (A) पद्माकर

36. ‘‘सखि वे मुझसे कहकर जाते’’ ౼किस कवि काव्य-पंक्ति हैं ?
(A) सियारामशरण गुप्त
(B) मैथिलीशरण गुप्त
(C) अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध
(D) जगदीश गुप्त
36. (B) मैथिलीशरण गुप्त

37. सुमेलित कीजिए :
(A) बसो मोरे नैनन में नन्दलाल (i) नानकदेव
(B) प्रभुजी मेरे अवगुण चित्त न धरो (ii) कबीर
(C) अब लौं नसानी अब न नसै हौं (iii) सूरदास
(D) अव्वल अल्लह नूर उपाया क़ुदरत के सब बन्दे (iv) तुलसीदास
(v) मीराबाई
कूट :
a b c d
(A) (v) (iii) (iv) (i)
(B) (iv) (ii) (iii) (i)
(C) (iii) (iv) (v) (i)
(D) (ii) (iii) (iv) (v)
37. (A)
(A) बसो मोरे नैनन में नन्दलाल (मीराबाई)
(B) प्रभुजी मेरे अवगुण चित्त न धरो (सूरदास)
(C) अब लौं नसानी अब न नसै हौं (तुलसीदास)
(D) अव्वल अल्लह नूर उपाया क़ुदरत के सब बन्दे (कबीर)

38. ‘‘आवत जात पनहियां टूटी बिसरि गयो हरि नाम’’ ౼यह पंक्ति किस कवि की है ?
(A) चतुर्भुजदास
(B) सूरदास
(C) कुंभनदास
(D) नन्ददास
38. (C) कुंभनदास

39. ‘‘कुन्दन को रंग फीको लगै, झलकै अति अंगनि चारु गौराई’’ ౼यह काव्य-पंक्ति किस कवि की है ?
(A) भूषण
(B) बिहारी
(C) देव
(D) मतिराम
39. (D) मतिराम

40. ‘‘आह, वेदना मिली विदाई’’ ౼किस नाटक के गीत की पंक्ति है?
(A) अजातशत्रु
(B) चन्द्रगुप्त
(C) स्कन्दगुप्त
(D) धवस्वामिनी
40. (C) स्कन्दगुप्त

41. ‘‘काव्यानुभूति की जटिलता चित्तवृत्तियों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि संवादी-विसंवादी वृत्तियों के द्वन्द्व पर आधारित है।’’ ౼यह कथन किसका है?
(A) रामचन्द्र शुक्ल
(B) नामवर सिंह
(C) नन्ददुलारे वाजपेयी
(D) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
41. (A) रामचन्द्र शुक्ल

42. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए :
(A) धूप का तन दीप सी मैं (i) निराला
(B) मधुप गुनगुनाकर कह जाता (ii) पन्त
(C) स्नेह निर्झर बह गया है (iii) नरेन्द्र शर्मा
(D) हाय, मृत्यु का ऐसा अमर अपार्थिव पूजन (iv) महादेवी
(v) प्रसाद
कूट :
a b c d
(A) (ii) (i) (iii) (iv)
(B) (iv) (v) (i) (ii)
(C) (v) (iii) (iv) (ii)
(D) (v) (ii) (i) (iii)
42. (B)
(A) धूप का तन दीप सी मैं (महादेवी)
(B) मधुप गुनगुनाकर कह जाता (प्रसाद)
(C) स्नेह निर्झर बह गया है (निराला)
(D) हाय, मृत्यु का ऐसा अमर अपार्थिव पूजन (पन्त)

43. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए :
(A) दोनों ओर प्रेम पलता है (1) प्रसाद
(B) धिक् जीवन जो पाता ही आया विरोध (2) तुलसीदास
(C) परहित सरिस धर्म नहीं भाई (3) निराला
(D) बीन भी हूं मैं तुम्हारी रागिनी भी हूं (4) मैथिलीशरण गुप्त
(5) महादेवी
कूट :
a b c d
(A) (ii) (i) (v) (iv)
(B) (v) (ii) (i) (iv)
(C) (iv) (iii) (ii) (v)
(D) (ii) (ii) (iv) (i)
43. (C)
(A) दोनों ओर प्रेम पलता है (मैथिलीशरण गुप्त)
(B) धिक् जीवन जो पाता ही आया विरोध (निराला)
(C) परहित सरिस धर्म नहीं भाई (तुलसीदास)
(D) बीन भी हूं मैं तुम्हारी रागिनी भी हूं (महादेवी)

44. सुमेलित कीजिए :
(A) शब्दार्थौ सहितौ काव्यम् (1) मम्मट
(B) तददौषौ शब्दार्थौ सगुणावनलंकृती पुनः क्वापि (2) विश्वनाथ
(C) रमणीयार्थ प्रतिपादकः शब्द काव्यम् (3) भामह
(D) वाक्यं रसात्मकं काव्यम् (4) आनन्दवर्द्धन
(5) पंडितराज जगन्नाथ
कूट :
a b c d
(A) (v) (iv) (ii) (iii)
(B) (iii) (i) (v) (ii)
(C) (ii) (iii) (vi) (v)
(D) (i) (iv) (v) (ii)
44. (B)
(A) शब्दार्थौ सहितौ काव्यम् (भामह)
(B) तददौषौ शब्दार्थौ सगुणावनलंकृती पुनः क्वापि (मम्मट)
(C) रमणीयार्थ प्रतिपादकः शब्द काव्यम् (पंडितराज जगन्नाथ)
(D) वाक्यं रसात्मकं काव्यम् (विश्वनाथ)

45. ‘‘प्रभुजी तुम चन्दन हम पानी’’ ౼यह किसकी पंक्ति है ?
(A) सन्त दादूदयल
(B) रैदास
(C) सन्त पापा
(D) सन्त पल्टूदास
45. (B) रैदास

46. निम्नलिखित पंक्तियों और कवियों का सुमेलन कीजिए :
(A) कनक कदलि पर सिंह समारल ता पर मेरु समाने (1) घनानन्द
(B) नैन नचाय कही मुसुकाय, लला फिर आइयो खेलन होरी (2) रसखान
(C) अति सूधो सनेह को मारग है (3) विद्यापति
(D) मोर पखा सिर ऊपर राखि हों, कुंज की माल गले पहिरौगी (4) मतिराम
(5) पद्माकर
कूट :
a b c d
(A) (ii) (iii) (i) (iv)
(B) (iii) (v) (i) (ii)
(C) (v) (ii) (i) (iii)
(D) (iv) (iii) (ii) (v)
46. (B)
(A) कनक कदलि पर सिंह समारल ता पर मेरु समाने (विद्यापति)
(B) नैन नचाय कही मुसुकाय, लला फिर आइयो खेलन होरी (पद्माकर)
(C) अति सूधो सनेह को मारग है (घनानन्द)
(D) मोर पखा सिर ऊपर राखि हों, कुंज की माल गले पहिरौगी (रसखान)

47. ‘‘उज्ज्वल वरदान चेतना का, सौन्दर्य जिसे सब कहते हैं’’ ౼यह पंक्ति किस सर्ग से है ?
(A) श्रद्धा (B) आशा
(C) लज्जा (D) आनन्द
47. (C) लज्जा

48. ‘‘सुनिहै कथा कौन निर्गुन को, पचि पचि बात बनावत, सगुन सुमेरू प्रगट देखियत, तुम तृण की ओट दुरावत’’ ౼ये पंक्तियाँ किसकी हैं?
(A) सूरदास (B) नन्ददास
(C) कृष्णदास (D) परमानन्द दास
48. (A) सूरदास

49. ‘‘कितना अनुभूतिपूर्ण था वह एक क्षण का आलिंगन ?’’ ౼ यह कथन किस रचना से है ?
(A) ध्रुवस्वामिनी (B) प्रेमयोगिनी
(C) कर्पूर मंजरी (D) नीलदेवी
49. (A) ध्रुवस्वामिनी

50. निम्नलिखित पंक्तियों के साथ उनके लेखकों को सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) मैं साहित्य को मनुष्य की दृष्टि से देखने का पक्षपाती हूँ (i) बालकृष्ण भट्ट
(B) नाद सौन्दर्य से कविता की आयु बढ़ती है (ii) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
(C) साहित्य जन समूह के हृदय का विकास है (iii) प्रतापनारायण मिश्र
(D) आचरण की सभ्यता का यह देश ही निराला है (iv) रामचन्द्र शुक्ल (v) सरदार पूर्णसिंह
कूट :
a b c d
(A) i ii iii iv
(B) ii iv i v
(C) ii iii iv v
(D) v i ii iii
50. (B)
(A) मैं साहित्य को मनुष्य की दृष्टि से देखने का पक्षपाती हूँ (हज़ारी प्रसाद द्विवेदी)
(B) नाद सौन्दर्य से कविता की आयु बढ़ती है (रामचन्द्र शुक्ल)
(C) साहित्य जन समूह के हृदय का विकास है (बालकृष्ण भट्ट)
(D) आचरण की सभ्यता का यह देश ही निराला है (सरदार पूर्णसिंह)

51. निम्नलिखित कवियों को उनकी पंक्तियों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) अज्ञेय (i) बात बोलेगी हम नहीं, भेद खोलेगी बात ही
(B) निराला (i i) मुक्त करो नारी को मानव
(C) पन्त (i i i) रूपों में एक अरून्प सदा खिलता है
(D) शमशेर बहादुर सिंह (iv) बान्धो न नाव इस ठाव बन्धु
(v) व्यक्ति का धर्म है तप, करुणा, क्षमा
कूट :
a b c d
(A) (iii) (iv) (ii) (i)
(B) (i) (ii) (iii) (iv)
(C) (ii) (iii) (i) (iv)
(D) (v) (iv) (iii) (ii)
51. (A)
(A) अज्ञेय౼ रूपों में एक अरून्प सदा खिलता है
(B) निराला౼ बान्धो न नाव इस ठाव बन्धु
(C) पन्त౼ मुक्त करो नारी को मानव
(D) शमशेर बहादुर सिंह౼ बात बोलेगी हम नहीं, भेद खोलेगी बात ही

52. निम्नलिखित पंक्तियों को उनके कवियों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) केशव कहि न जाइ, का कहिए (i) सूर
(B) अबिगति कछु कहत न आवै (ii) कबीर
(C) राम भगति अनियारे तीर (iii) जायसी
(D) जोरी लाइ रकत कै लेई (iv) तुलसी (v) मीरा
कूट :
a b c d
(A) i ii ii iv
(B) iv v iii ii
(C) iv i ii iii
(D) ii iii i v
52. (C)
(A) केशव कहि न जाइ, का कहिए (तुलसी)
(B) अबिगति कछु कहत न आवै (सूर)
(C) राम भगति अनियारे तीर (कबीर)
(D) जोरी लाइ रकत कै लेई (जायसी)

53. ‘‘जसोदा ! कहा कहौं हौं बात । तुम्हरे सुत के करतब मो पै कहत कहे नहिं जात।’’ ये किस कवि की पंक्तियां हैं ?
(A) सूरदास (B) चतुर्भुजदास
(C) कुम्भनदास (D) हरिदास
53. (B) चतुर्भुजदास

54. ‘‘यह अभिनव मानव प्रजा सृष्टि
द्वयता में लगी निरन्तर ही वर्णों की करती रहे सृष्टि ।’’
ये काव्य पंक्तियां किस कवि की हैं ?
(A) जयशंकर प्रसाद (B) पंत
(C) महादेवी वर्मा (D) दिनकर
54. (A) जयशंकर प्रसाद

55. इन उक्तियों को उनके आचार्यों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) शब्दार्थ शरीरं ताबत् काव्यम् (i) भामह
(B) काव्यं ग्राह्यम अलंकारात् (ii) मम्मट
(C) मुख्यार्थहतिर्दोषः (iii) विश्वनाथ
(D) करोति कीर्तिं प्रतिं च साधु काव्य निबन्धनम् (iv) वामन (v) दण्डी
कूट :
a b c d
(A) i ii iii iv
(B) v iv ii i
(C) ii iii iv v
(D) v iv iii ii
55. (B)

56. इन स्थापनाओं को उनके विद्वानों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) महान् कवि वही हो सकता है जो साथ में गम्भीर हो (i) टी. एस. इलियट
(B) कविता व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि उससे पलायन है (ii) कॉलरिज
(C) काव्य भाषा तथ्यात्मक नहीं, रागात्मक होती है (iii) लांजाइनस
(D) महान् व्यक्तित्व ही महान् विचारों से सम्पन्न होता है (iv) आई॰ ए॰ रिचर्ड्स
(v) ड्राइडन
कूट :
a b c d
(A) i ii iii iv
(B) iii ii iv v
(C) v iv iii i
(D) ii i iv iii
56. (B)
(A) महान् कवि वही हो सकता है जो साथ में गम्भीर हो ౼कॉलरिज
(B) कविता व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि उससे पलायन है ౼टी. एस. इलियट
(C) काव्य भाषा तथ्यात्मक नहीं, रागात्मक होती है ౼आई॰ ए॰ रिचर्ड्स
(D) महान् व्यक्तित्व ही महान् विचारों से सम्पन्न होता है ౼लांजाइनस

57. निम्नलिखित उदाहरणों को उनके अलंकारों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) दृग अरुझत टूटत कुटुम, जुरत चतुर चित प्रीति। परति गाँठ दुरजन हिए, दई नई यह रीति
(i) रूपक
(B) चंचल-अंचल सा नीलाम्बर (ii) उत्प्रेक्षा
(C) खिला हो ज्यों बिजली का फूल मेघ वन बीच गुलाबी रंग (iii) असंगति
(D) अम्बर पनघट में डुबो रही तारा-घट उषा-नागरी (iv) विरोधाभास
(v) उपमा
कूट :
a b c d
(A) i ii iii iv
(B) iii v ii i
(C) ii iii iv v
(D) v iv i iii
57. (B)
(A) दृग अरुझत टूटत कुटुम, जुरत चतुर चित प्रीति। परति गाँठ दुरजन हिए, दई नई यह रीति
౼असंगति
(B) चंचल-अंचल सा नीलाम्बर ౼उपमा
(C) खिला हो ज्यों बिजली का फूल मेघ वन बीच गुलाबी रंग ౼उत्प्रेक्षा
(D) अम्बर पनघट में डुबो रही तारा-घट उषा-नागरी ౼रूपक

58. निम्नलिखित पंक्तियों को उनके कवियों के साथ सुमेलित कीजिए :
सूची-1 सूची-2
(A) कितना अकेला हूँ मैं, इस समाज में (i) मुक्तिबोध
(B) पिस गया वह भीतरी और बाहरी दो पाटों के बीच (ii) अज्ञेय
(C) वे पत्तर जो रहे हैं, तुम सपने जोड़ रहे हो (iii) नागार्जुन
(D) मैं ही वसन्त का अग्रदूत (iv) रघुवीर सहाय
(v) निराला
कूट :
a b c d
(A) iv i iii v
(B) i ii iii iv
(C) ii iii iv v
(D) v iv iii i
58. (A)
(A) कितना अकेला हूँ मैं, इस समाज में ౼रघुवीर सहाय
(B) पिस गया वह भीतरी और बाहरी दो पाटों के बीच ౼मुक्तिबोध
(C) वे पत्तर जोड़ रहे हैं, तुम सपने जोड़ रहे हो ౼नागार्जुन
(D) मैं ही वसन्त का अग्रदूत ౼निराला

59. ‘‘आगम वेअ पुराणेहि, पाणिअ माण वहन्ति’’ पंक्ति किसकी है ?
(A) सरहपा (B) कण्हपा (C) शबरपा (D) डोंबिपा
59. (B) कण्हपा

60. “संदेसडउ सबित्थरउ पइ मइ कहणु न जाइ।
जे कालांगुलि मूंदडऊ सो बांहडी समाइ।”
इन काव्य पंक्तियों के रचनाकार हैं :
(A) विमलसूरि (B) अद्दहमाण (C) हेमचन्द्र (D) दामोदर भट्ट
60. (B) अद्दहमाण

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बुधवार, 24 जनवरी 2018

दूधनाथ सिंह की रचनाएँ

दूधनाथ सिंह की रचनाएँ
जन्म : 17 अक्टूबर 1936 , सोबंथा गाँव, (बलिया, उत्तर प्रदेश)
निधन : 11 जनवरी, 2018 ई. (इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश)
जनवादी साहित्यकार दूधनाथ सिंह ने अपनी कहानियों के माध्यम से साठोत्तरी भारत के पारिवारिक, सामाजिक, आर्थिक, नैतिक एवं मनोवैज्ञानिक सभी क्षेत्रों में उत्पन्न विसंगतियों एवं विद्रूपताओं को चुनौती दी।
यम-गाथा नाटक मिथक पर आधारित है और इसका कथानक व्यापक सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों - साममन्तवाद, सत्ता की राजनीति, हिंसा, अन्याय, सामाजिक-भेदभाव और नस्लवाद पर सवाल पर खड़े करता है।
साठोत्तरी कहानी और अकहानी के सूत्रधारों में से
दूधनाथ सिंह उन कथाकारों में शामिल हैं जिन्होंने नई कहानी आंदोलन को चुनौती दी और साठोत्तरी कहानी आंदोलन का सूत्रपात किया। 'हिन्दी के चार यार' के रूप में प्रसिद्ध में से एक। अन्य तीन हैं - ज्ञानरंजन, काशीनाथ सिंह और रवीन्द्र कालिया।
उपन्यास : आखिरी कलाम (2003 ई.), बाबरी मस्जिद-विध्वंस पर यात्रा-वृतान्त शैली में रचित उपन्यास ।
कहानी-संग्रह : सपाट चेहरे वाला आदमी (1967 ई.), सुखान्त (1971 ई.), प्रेमकथा का अन्त न कोई, पहला क़दम (1976 ई.) माई का शोकगीत (1992 ई.), नमो अन्धकारम् (1998 ई.), धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे (2002 ई.), निष्कासन (2002 ई.), तू फू (2011 ई.), जलमुर्गिर्यों का शिकार, कथा-समग्र।
चर्चित कहानियाँ : विजेता, कबन्ध, रीछ, सुखान्त, प्रतिशोध इत्यादि।
कविता-संग्रह : अगली शताब्दी के नाम, एक और भी आदमी है, युवा खुशबू, सुरंग से लौटते हुए (लंबी कविता), तुम्हारे लिए, एक अनाम कवि की कविताएँ।
नाटक : यमगाथा (1990 ई.), पौराणिक गाथा को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है। पुरुरवा, उर्वशी और इन्द्र इसके मुख्यपात्र हैं।
आलोचना : निराला : आत्महंता आस्था, महादेवी, मुक्तिबोध : साहित्य में नई प्रवृत्तियाँ, अन्तःकरण का आयतन (मुक्तिबोध की कविता पर एक पुस्तक)।
संस्मरण : लौट आ ओ धार (1995 ई.), सबको अमर देखना चाहता हूँ।
साक्षात्कार : कहा-सुनी (2005 ई.), इसमें दूधनाथ सिंह के चार साक्षात्कार और चार निबन्ध (महाजनी सभ्यता और आज की दुनिया, सुमित्रानन्दन पन्त का अन्तर्गमन, समकालीन हिन्दी कविता में रीतिवाद तथा कहानी का झूठा सच) संकलित हैं।
सम्पादन : तारापथ (सुमित्रानंदन पंत की कविताओं का चयन), एक शमशेर भी है, दो शरण (निराला की भक्ति-कविताएँ), भुवनेश्वर-समग्र, पक्षधर (पत्रिका – आपात काल के दौरान एक अंक का सम्पादन, जिसे सरकार द्वारा ज़ब्त कर लिया गया)।
सम्मान : भारत भारती सम्मान, भारतेंदु सम्मान, शरद जोशी स्मृति सम्मान, कथाक्रम सम्मान, साहित्य भूषण सम्मान।

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मंगलवार, 23 जनवरी 2018

प्रसाद के नाटक स्कन्दगुप्त के पात्र

प्रसाद के नाटक स्कन्दगुप्त के पात्र
पुरुष-पात्र
स्कन्दगुप्त : युवराज (विक्रमादित्य)
कुमारगुप्त : मगध का सम्राट्
गोविन्दगुप्त : कुमारगुप्त का भाई
पुरगुप्त : कुमारगुप्त का छोटा पुत्र
पर्णदत्त : मगध का महानायक
चक्रपालित : पर्णदत्त का पुत्र
बन्धुवर्म्मा : मालव का राजा
भीमवर्म्मा : बन्धुवर्म्मा का भाई
मातृगुप्त : काव्यकर्ता कालिदास
प्रपंचबुद्धि : बौद्ध कापालिक
शर्वनाग : अंर्वेद का विषयपति
धातुसेन (कुमारदास) : कुमारदास के प्रछन्न रूप में सिंहल का राजकुमार
भटार्क : नवीन महाबलाधिकृत
पृथ्वीसेन : मंत्री कुमारात्य
खिंगिल : हूण आक्रमणकारी
मुद्गल : विदूषक
प्रख्यातकीर्ति : लंकराज कुल का श्रमण, महाबोधि-विहार का स्थविर
नारी-पात्र
देवकी : कुमारगुप्त की बड़ी रानी
अनन्तदेवी : कुमारगुप्त की छोटी रानी, पुरगुप्त की माता
जयमाला : बन्धुवर्मा की स्त्री, मालव की रानी
देवसेना : बन्धुवर्म्मा की बहिन
विजया : मालव के धनकुबेर की कन्या
कमला : भटार्क की जननी
रामा : शर्वनाग की स्त्री
मालिनी : मातृगुप्त की प्रणयिनी
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प्रसाद के नाटक चन्द्रगुप्त के पात्र

>प्रसाद के नाटक चन्द्रगुप्त के पात
चाणक्य (विष्णुगुप्त) : मौर्य्य साम्राज्य का निर्माता
चन्द्रगुप्त : मौर्य्यःसम्राट्
नन्द : मगधःसम्राट्
राक्षस : मगध का अमात्य
वररुचि (कात्यायन) : मगध का अमात्य
शकटार : मगध का मंत्री
आम्भीक : तक्षशिला का राजकुमार
सिंहरण : मालव गणमुख्य का कुमार
पर्वतेश्वर : पंजाब का राजा (पोरस)
सिकन्दर : ग्रीक विजेता
फिलिप्स : सिकन्दर का क्षत्रप
मौर्य्य-सेनापति : चन्द्रगुप्त का पिता
एनीसाक्रीटीज : सिकन्दर का सहचर
देवबल, नागदत्त, गणमुख्य : मालव गणतंत्र के पदाधिकारी
साइबर्टियस, मेगास्थनीज : यवन दूत
गान्धार-नरेश : आम्भीक का पिता
सिल्यूकस : सिकन्दर का सेनापति
दाण्ड्यायन : एक तपस्वी
नारीःपात्र
अलका : तक्षशिला की राजकुमारी
सुवासिनी : शकटार की कन्या
कल्याणी : मगध राजकुमारी
नीला, लीला : कल्याणी की सहेलियाँ
मालविका : सिन्धु देश की राजक्मारी
कार्नेलिया : सिल्यूकस की कन्या
मौर्य्य-पत्नी : चन्द्रगुप्त की माता
एलिस : कार्नेलिया की सहेली
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