शनिवार, 29 नवंबर 2014

साधो, आज मेरे सत की परीक्षा है—विजयदेव नारायण साही

सत की परीक्षा—विजयदेव नारायण साही
साधो, आज मेरे सत की परीक्षा है
आज मेरे सत की परीक्षा है
बीच में आग जल रही है
उस पर बहुत बड़ कड़ाह रखा है
कड़ह में तेल उबल रहा है
उस तेल में मुझे सबके सामने
हाथ जालना है
साधो, आज मेरे सत की परीक्षा है!
               —साखी से

प्रजा विचित्र तुम्हारी है—नागार्जुन

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       मुहम्मद इलियास हुसैन

सच न बोलना—नागार्जुन

मलाबार के खेतिहरों को अन्न चाहिए खाने को,
डंडपाणि को लठ्ठ चाहिए बिगड़ी बात बनाने को!
जंगल में जाकर देखा
, नहीं एक भी बांस दिखा!
सभी कट गए सुना
, देश को पुलिस रही सबक सिखा!

जन-गण-मन अधिनायक जय हो
, प्रजा विचित्र तुम्हारी है
भूख-भूख चिल्लाने वाली अशुभ अमंगलकारी है!

बंद सेल
, बेगूसराय में नौजवान दो भले मरे
जगह नहीं है जेलों में
, यमराज तुम्हारी मदद करे। 

ख्याल करो मत जनसाधारण की रोज़ी का
, रोटी का,
फाड़-फाड़ कर गला
, न कब से मना कर रहा अमरीका!
बापू की प्रतिमा के आगे शंख और घड़ियाल बजे!
भुखमरों के कंकालों पर रंग-बिरंगी साज़ सजे!

ज़मींदार है
, साहुकार है, बनिया है, व्योपारी है,
अंदर-अंदर विकट कसाई
, बाहर खद्दरधारी है!
सब घुस आए भरा पड़ा है
, भारतमाता का मंदिर
एक बार जो फिसले अगुआ
, फिसल रहे हैं फिर-फिर-फिर!

छुट्टा घूमें डाकू गुंडे
, छुट्टा घूमें हत्यारे,
देखो
, हंटर भांज रहे हैं जस के तस ज़ालिम सारे!
जो कोई इनके खिलाफ़ अंगुली उठाएगा बोलेगा
,
काल कोठरी में ही जाकर फिर वह सत्तू घोलेगा!

माताओं पर
, बहिनों पर, घोड़े दौड़ाए जाते हैं!
बच्चे
, बूढ़े-बाप तक न छूटते, सताए जाते हैं!
मार-पीट है
, लूट-पाट है, तहस-नहस बरबादी है,
ज़ोर-जुलम है
, जेल-सेल है। वाह खूब आज़ादी है! 

रोज़ी-रोटी
, हक की बातें जो भी मुंह पर लाएगा,
कोई भी हो
, निश्चय ही वह कम्युनिस्ट कहलाएगा!
नेहरू चाहे जिन्ना
, उसको माफ़ करेंगे कभी नहीं,
जेलों में ही जगह मिलेगी
, जाएगा वह जहां कहीं!

सपने में भी सच न बोलना
, वर्ना पकड़े जाओगे,
भैया
, लखनऊ-दिल्ली पहुंचो, मेवा-मिसरी पाओगे!
माल मिलेगा रेत सको यदि गला मजूर-किसानों का
,
हम मर-भुक्खों से क्या होगा
, चरण गहो श्रीमानों का!
—‘हज़ार-हज़ार बाहों वाली से

शुक्रवार, 28 नवंबर 2014

संतन को कहा सीकरी सों काम— कुम्भनदास

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       मुहम्मद इलियास हुसैन

 

संतन को कहा सीकरी सों काम कुम्भनदास

संतन को कहा सीकरी सों काम?
आवत जात पनहियाँ टूटी
,

बिसरि गयो हरि नाम।।
जिनको मुख देखे दुख उपजत

तिनको करिबे परी सलाम।।
कुभंनदास लाल गिरिधर बिनु
,

और सबै बेकाम।।


अब लौं नसानी, अब न नसैहों —तुलसीदास

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       मुहम्मद इलियास हुसैन

 

अब लौं नसानी, अब न नसैहों तुलसीदास


अब लौं नसानी, अब न नसैहों।
रामकृपा भव-निसा सिरानी जागे फिर न डसैहौं॥
पायो नाम चारु चिंतामनि उर करतें न खसैहौं।
स्याम रूप सुचि रुचिर कसौटी चित कंचनहिं कसैहौं॥
परबस जानि हँस्यो इन इंद्रिन निज बस ह्वै न हँसैहौं।
मन मधुपहिं प्रन करि, तुलसी रघुपति पदकमल बसैहौं॥

प्रभु जी तुम चंदन हम पानी—रैदास

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       मुहम्मद इलियास हुसैन

प्रभु जी तुम चंदन हम पानीरैदास


प्रभु जी तुम चंदन हम पानी।
जाकी अंग-अंग बास समानी॥
प्रभु जी तुम घन बन हम मोरा।
जैसे चितवत चंद चकोरा॥
प्रभु जी तुम दीपक हम बाती।
जाकी जोति बरै दिन राती॥
प्रभु जी तुम मोती हम धागा।
जैसे सोनहिं मिलत सोहागा।
प्रभु जी तुम स्वामी हम दासा।
ऐसी भक्ति करै 'रैदासा॥



गुरुवार, 27 नवंबर 2014

जयशंकर प्रसाद के नाटक




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— मुहम्मद इलियास हुसैन

जयशंकर प्रसाद  के  नाटक

• सज्जन (1910 ई., महाभारत पर आधारित)
• कल्याणी-परिणय (1912 ई., पात्र : चन्द्रगुप्त मौर्य, सिल्यूकस, कार्नेलिया, कल्याणी)
• 'करुणालय' (1913, 1928 स्वतंत्र प्रकाशन, गीतिनाट्य, राजा हरिश्चन्द्र की कथा) इसका प्रथम प्रकाशन 'इन्दु' (1913 ई.) में हुआ।
• प्रायश्चित् (1013,  पात्र जयचन्द, पृथ्वीराज, संयोगिता)
• राज्यश्री (1914)
• विशाख (1921)
• अजातशत्रु (1922)
• जनमेजय का नागयज्ञ (1926)
• कामना (1927)
• स्कन्दगुप्त (1928,  पात्र विक्रमादित्य, पर्णदत्त, बन्धवर्मा, भीमवर्मा, मातृगुप्त, प्रपंचबुद्धि, शर्वनाग, धातुसेन (कुमारदास), भटार्क, पृथ्वीसेन, खिंगिल, मुद्गल, कुमारगुप्त, अननतदेवी, देवकी, जयमाला, देवसेना, विजया, तमला, रामा, मालिनी, स्कन्दगुप्त)
• एक घूँट (1929,  पात्र : बनलता, रसाल, आनन्द, प्रेमलता)
• चन्द्रगुप्त (1931,  पात्र चाणक्य, चन्द्रगुप्त, सिकन्दर, पर्वतेश्वर, सिंहरण, आम्भीक, अलका, कल्याणी, कार्नेलिया, मालविका, शकटार)
• ध्रुवस्वामिनी (1933,  पात्र चन्द्रगुप्त, रामगुप्त, शिखरस्वामी, पुरोहित, शकराज, खिंगिल, मिहिरदेव, ध्रुवस्वामिनी, मंदाकिनी, कोमा)

कवि, कुछ ऐसी तान सुनाओ, जिससे उथल-पुथल मच जाए—बालकृष्णशर्मा नवीन https://www.google.co.in/?gws_rd=ssl


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मुहम्मद इलियास हुसैन

विप्लव-गान
कवि, कुछ ऐसी तान सुनाओ, 
जिससे उथल-पुथल मच जाए,
एक हिलोर इधर से आए, 
एक हिलोर उधर से आए,
प्राणों के लाले पड़ जाएँ,
त्राहि-त्राहि रव नभ में छाए,
नाश और सत्यानाशों का -
धुँआधार जग में छा जाए,
बरसे आग, जलद जल जाएँ,
भस्मसात भूधर हो जाएँ,
पाप-पुण्य सद्सद भावों की,
धूल उड़ उठे दायें-बायें,
नभ का वक्षस्थल फट जाए-
तारे टूक-टूक हो जाएँ
कवि कुछ ऐसी तान सुनाओ,
जिससे उथल-पुथल मच जाए।
माता की छाती का अमृत-
मय पय काल-कूट हो जाए,
आँखों का पानी सूखे,
वे शोणित की घूँटें हो जाएँ,
एक ओर कायरता काँपे,
गतानुगति विगलित हो जाए,
अंधे मूढ़ विचारों की वह
अचल शिला विचलित हो जाए,
और दूसरी ओर कंपा देने
वाला गर्जन उठ धाए,
अंतरिक्ष में एक उसी नाशक
तर्जन की ध्वनि मंडराए,
कवि कुछ ऐसी तान सुनाओ,
जिससे उथल-पुथल मच जाए,
नियम और उपनियमों के ये
बंधक टूक-टूक हो जाएँ,
विश्वंभर की पोषक वीणा
के सब तार मूक हो जाएँ
शांति-दंड टूटे उस महा-
रुद्र का सिंहासन थर्राए
उसकी श्वासोच्छ्वास-दाहिका,
विश्व के प्रांगण में घहराए,
नाश! नाश!! हा महानाश!!! की
प्रलयंकारी आँख खुल जाए,
कवि, कुछ ऐसी तान सुनाओ
जिससे उथल-पुथल मच जाए।
सावधान! मेरी वीणा में,
चिनगारियाँ आन बैठी हैं,
टूटी हैं मिजराबें, अंगुलियाँ
दोनों मेरी ऐंठी हैं।
कंठ रुका है महानाश का
मारक गीत रुद्ध होता है,
आग लगेगी क्षण में, हृत्तल
में अब क्षुब्ध युद्ध होता है,
झाड़ और झंखाड़ दग्ध हैं -
इस ज्वलंत गायन के स्वर से
रुद्ध गीत की क्रुद्ध तान है
निकली मेरे अंतरतर से!
कण-कण में है व्याप्त वही स्वर
रोम-रोम गाता है वह ध्वनि,
वही तान गाती रहती है,
कालकूट फणि की चिंतामणि,
जीवन-ज्योति लुप्त है - अहा!
सुप्त है संरक्षण की घड़ियाँ,
लटक रही हैं प्रतिपल में इस
नाशक संभक्षण की लड़ियाँ।
चकनाचूर करो जग को, गूँजे
ब्रह्मांड नाश के स्वर से,
रुद्ध गीत की क्रुद्ध तान है
निकली मेरे अंतरतर से!
दिल को मसल-मसल मैं मेंहदी
रचता आया हूँ यह देखो,
एक-एक अंगुल परिचालन
में नाशक तांडव को देखो!
विश्वमूर्ति! हट जाओ!! मेरा
भीम प्रहार सहे न सहेगा,
टुकड़े-टुकड़े हो जाओगी,
नाशमात्र अवशेष रहेगा,
आज देख आया हूँ - जीवन
के सब राज़ समझ आया हूँ,
भ्रू-विलास में महानाश के
पोषक सूत्र परख आया हूँ,
जीवन गीत भूला दो - कंठ,
मिला दो मृत्यु गीत के स्वर से
रुद्ध गीत की क्रुद्ध तान है,
निकली मेरे अंतरतर से!
कवि, कुछ ऐसी तान सुनाओ, जिससे उथल-पुथल मच जाए—बालकृष्णशर्मा नवीन
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केशव, कहि न जाइ का कहिये—तुलसीदास

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मुहम्मद इलियास हुसैन

केशव, कहि न जाइ का कहिये ।
देखत तव रचना विचित्र अति
,समुझि मनहिमन रहिये ।
शून्य भीति पर चित्र
,रंग नहि तनु बिनु लिखा चितेरे ।
धोये मिटे न मरै भीति
, दुख पाइय इति तनु हेरे।
रविकर नीर बसै अति दारुन
,मकर रुप तेहि माहीं ।
बदन हीन सो ग्रसै चराचर
,पान करन जे जाहीं ।
कोउ कह सत्य
,झूठ कहे कोउ जुगल प्रबल कोउ मानै ।
तुलसीदास परिहरै तीनि भ्रम
, सो आपुन पहिचानै ।
विनयपत्रिका से

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मंगलवार, 25 नवंबर 2014

विश्व-जन की अर्चना में नहीं बाधक था-अज्ञेय


कितनी शान्ति! कितनी शान्ति!

                                                 -अज्ञेय

कितनी शान्ति! कितनी शान्ति!
समाहित क्यों नहीं होती यहाँ भी मेरे हृदय की क्रान्ति?
क्यों नहीं अन्तर-गुहा का अशृंखल दुर्बाध्य वासी,
अथिर यायावर, अचिर में चिर-प्रवासी
नहीं रुकता, चाह कर-स्वीकार कर-विश्रान्ति?
मान कर भी, सभी ईप्सा, सभी कांक्षा, जगत् की उपलब्धियाँ
सब हैं लुभानी भ्रान्ति!
तुम्हें मैं ने आह! संख्यातीत रूपों में किया है याद-
सदा प्राणों में कहीं सुनता रहा हूँ तुम्हारा संवाद-
बिना पूछे, सिद्धि कब? इस इष्ट से होगा कहाँ साक्षात्?
कौन-सी वह प्रात, जिस में खिल उठेगी-
क्लिन्न, सूनी, शिशिर-भींगी रात?
चला हूँ मैं, मुझे सम्बल रहा केवल बोध-पग-पग आ रहा हूँ पास;
रहा आतप-सा यही विश्वास
स्नेह से मृदु घाम से गतिमान रखता निविड मेरे साँस और उसाँस।
आह, संख्यातीत रूपों में तुम्हें मैं ने किया है याद!
किन्तु-सहसा हरहराते ज्वार-सा बढ़ एक हाहाकार
प्राण को झकझोर कर दुर्वार,
लील लेता रहा है मेरे अकिंचन कर्म-श्रम-व्यापार!
झेल लें अनुभूति के संचित कनक का जो इक_ा भार-
ऐसे कहाँ हैं अस्तित्व की इस जीर्ण चादर के
इकहरी बाट के ये तार!
गूँजती ही रही है दुर्दान्त एक पुकार-
कहाँ है वह लक्ष्य श्रम का-विजय जीवन की-तुम्हारा
प्रतिश्रुत वह प्यार!
हरहराते ज्वार-सा बढ़ सदा आया एक हाहाकार!
अहं! अन्तर्गुहावासी! स्व-रति! क्या मैं चीन्हता कोई न दूजी राह?
जानता क्या नहीं निज में बद्ध हो कर है नहीं निर्वाह?
क्षुद्र नलकी में समाता है कहीं बेथाह
मुक्त जीवन की सक्रिय अभिव्यंजना का तेज-दीप्त प्रवाह!
जानता हूँ। नहीं सकुचा हूँ कभी समवाय को देने स्वयं का दान,
विश्व-जन की अर्चना में नहीं बाधक था कभी इस व्यष्टि का अभिमान!
कान्ति अणु की है सदा गुरु-पुंज का सम्मान।
बना हूँ कर्ता, इसी से कहूँ-मेरी चाह, मेरा दाह,
मेरा खेद और उछाह :
मुझ सरीखी अगिन लीकों से, मुझे यह सर्वदा है ध्यान,
नयी, पक्की, सुगम और प्रशस्त बनती है युगों की राह!
तुम! जिसे मैं ने किया है याद, जिस से बँधी मेरी प्रीत-
कौन तुम? अज्ञात-वय-कुल-शील मेरे मीत!
कर्म की बाधा नहीं तुम, तुम नहीं प्रवृत्ति से उपराम-
कब तुम्हारे हित थमा संघर्ष मेरा-रुका मेरा काम?
तुम्हें धारे हृदय में, मैं खुले हाथों सदा दूँगा बाह्य का जो देय-
नहीं गिरने तक कहूँगा, 'तनिक ठहरूँ क्योंकि मेरा चुक गया पाथेय!'
तुम! हृदय के भेद मेरे, अन्तरंग सखा-सहेली हो,
खगों-से उड़ रहे जीवन-क्षणों के तुम पटु बहेली हो,
नियम भूतों के सनातन, स्फुरण की लीला नवेली हो,
किन्तु जो भी हो, निजी तुम प्रश्न मेरे, प्रेय-प्रत्यभिज्ञेय!
मेरा कर्म, मेरी दीप्ति, उद्भव-निधन, मेरी मुक्ति, तुम मेरी पहेली हो!

तुम जिसे मैं ने किया है याद, जिस से बँधी मेरी प्रीत!
लुभानी है भ्रान्ति-कितनी शान्ति! कितनी शान्ति!

नदी के द्वीप


नदी के द्वीप



हम नदी के द्वीप हैं।
हम नहीं कहते कि हमको छोड़कर स्रोतस्विनी बह जाए।

वह हमें आकार देती है।
हमारे कोण
, गलियाँ, अंतरीप, उभार, सैकत-कूल
सब गोलाइयाँ उसकी गढ़ी हैं।
 
माँ है वह! है
, इसी से हम बने हैं।
किंतु हम हैं द्वीप। हम धारा नहीं हैं।
स्थिर समर्पण है हमारा। हम सदा से द्वीप हैं स्रोतस्विनी के।
किंतु हम बहते नहीं हैं। क्योंकि बहना रेत होना है।
हम बहेंगे तो रहेंगे ही नहीं।
पैर उखड़ेंगे। प्लवन होगा। ढहेंगे। सहेंगे। बह जाएँगे।

 
और फिर हम चूर्ण होकर भी कभी क्या धार बन सकते
?
रेत बनकर हम सलिल को तनिक गँदला ही करेंगे।
अनुपयोगी ही बनाएँगे।
 
द्वीप हैं हम! यह नहीं है शाप। यह अपनी नियती है।
हम नदी के पुत्र हैं। बैठे नदी की क्रोड में।
वह बृहत भूखंड से हम को मिलाती है।
और वह भूखंड अपना पितर है।
नदी तुम बहती चलो।
भूखंड से जो दाय हमको मिला है
, मिलता रहा है,
माँजती
, सस्कार देती चलो। यदि ऐसा कभी हो -
 
तुम्हारे आह्लाद से या दूसरों के
,
किसी स्वैराचार से
, अतिचार से,
तुम बढ़ो
, प्लावन तुम्हारा घरघराता उठे -
यह स्रोतस्विनी ही कर्मनाशा कीर्तिनाशा घोर काल
,
प्रावाहिनी बन जाए -
तो हमें स्वीकार है वह भी। उसी में रेत होकर।
फिर छनेंगे हम। जमेंगे हम। कहीं फिर पैर टेकेंगे।
कहीं फिर भी खड़ा होगा नए व्यक्तित्व का आकार।
मात:
, उसे फिर संस्कार तुम देना।

'दुःख सब को माँजता है-अज्ञेय

''दुःख सब को माँजता है
   
और -
   
चाहे स्वयं सबको मुक्ति देना वह न जाने , किन्तु-
   
जिन को माँजता है
   
उन्हें यह सीख देता है कि सबको मुक्त रखें


गुरुवार, 20 नवंबर 2014

हिन्दी स्मरण एवं रेखाचित्र

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मुहम्मद इलियास हुसैन

हिन्दी स्मरण एवं रेखाचित्र : कालक्रमानुसार


1905  अनुमोदन का अन्त (महावीरप्रसाद द्विवेदी)
1907  इंग्लैंड के देहात में महाराज बनारस का कुआं (काशीप्रसाद जायसवाल)
1907  सभा की सभ्यता (महावीरप्रसाद द्विवेदी)
1908  लन्दन का फाग या कुहरा (प्यारेलाल मिश्र)
1909  मेरी नई दुनिया सम्बन्धिनी रामकहानी (भोलदत्त पांडेय)
1911  अमेरिका में आनेवाले विद्यार्थियों की सूचना (जगन्नाथ खन्ना)
1913  मेरी छुट्टियों का प्रथम सप्ताह (जगदीश बिहारी सेठ)
1913  वाशिंगटन महाविद्यालय का संस्थापन दिनोत्सव (पांडुरंग खानखोजे)
1918  इधर-उधर की बातें (रामकुमार खेमका)
1921  कुछ संस्मरण (वृन्दालाल वर्मा, सुधा 1921 में प्रकाशित)
1921  मेरे प्राथमिक जीवन की स्मृतियां (इलाचन्द्र जोशी, सुधा 1921 में प्रकाशित)
1929  पदम पराग (पदमसिंह शर्मा)
1930  रामा (महादेवी वर्मा)
1932  मदन मोहन के सम्बन्ध की कुछ पुरानी स्मृतियां (शिवराम पांडेय)
1934  बिन्दा (महादेवी वर्मा)
1935  घीसा (महादेवी वर्मा)
1935  बिट्टो (महादेवी वर्मा)
1935  सबिया (महादेवी वर्मा)
1936  शिकार (श्रीराम शर्मा)
1937  बोलती प्रतिमा (श्रीराम शर्मा, भाई जगन्नाथ इस संकलन का सर्वश्रेष्ठ संस्मरण)
1937  साहित्यिकों के संस्मरण (ज्योतिलाल भार्गव, हंस के प्रेमचन्द स्मृति अंक 1937 सं. पराड़कर)
1937  क्रान्तियुग के संस्मरण (मन्मथनाथ गुप्त)
1938  झलक (शिवनारायण टंडन)
1938  लाल तारा (रामवृक्ष बेनीपुरी)
1939  प्राणों का सौदा (श्रीराम शर्मा)
1940  रेखाचित्र (प्रकाशचन्द्र गुप्त)
1940  टूटा तारा (संस्मरण : मौलवी साहब, देवी बाबा, राजा राधिकारमण प्र. सिंह)
1941  अतीत के चलचित्र (महादेवी वर्मा)
1942  तीस दिन मालवीय जी के साथ (रामनरेश त्रिपाठी)
1942  गोर्की के संस्मरण (इलाचन्द्र जोशी)
1943  स्मृति की रेखाएं  (महादेवी वर्मा)
1943  चरित्र रेखा  (जनार्दन प्रसाद द्विज)
1946  माटी की मूरतें (रामवृक्ष बेनीपुरी)
1946  वे दिन वे लोग (शिवपूजन सहाय)
1946  पंच चिह्न  (शांतिप्रसाद द्विवेदी)
1947  मिट्टी के पुतले (प्रकाशचन्द्र गुप्त)
1947  पुरानी स्मृतियां और नए स्केच (प्रकाशचन्द्र गुप्त)
1947  स्मृति की रेखाएं (महादेवी वर्मा)
1948  सन् बयालीस के संस्मरण (श्रीराम शर्मा)
1949  माटी हो गई सोना (कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर’)
1949  एलबम (सत्यजीवन वर्मा भारतीय’)
1949  रेखाएं बोल उठीं (देवेन्द्र सत्यार्थी)
1949  दीप जले शंख बजे (कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर’)
1949  ज़्यादा अपनी, कम पराई (अश्क’)
1949  जंगल के जीव (श्रीराम शर्मा)
1950  गेहूं और गुलाब (रामवृक्ष बेनीपुरी)
1950  क्या गोरी क्या सांवरी (देवेन्द्र सत्यार्थी)
1950  लंका महाराजिन (ओंकार शरद)
1951  अमिट रेखाएं (सत्यवती मल्लिक)
1952  हमारे आराध्य (बनारसीदास चतुर्वेदी)
1952  संस्मरण (बनारसीदास चतुर्वेदी)
रेखाचित्र (बनारसीदास चतुर्वेदी)
1952  सेतुबन्ध (बनारसीदास चतुर्वेदी)
1953  संस्मरण (बनारसीदास चतुर्वेदी)
1954  ज़िन्दगी मुस्कायी (कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर)
1954  गांधी कुछ स्मृतियां (जैनेन्द्र)।
1954  ये और वे (जैनेन्द्र)
1955  बचपन की स्मृतियां (राहुल सांकृत्यायन)
1955  मैं भूल नहीं सकता (कैलाशनाथ काटजू)
1955  रेखाएं और चित्र (उपेन्द्रनाथ अश्क)
1955  रेखा और रंग (विनय मोहन शर्मा)
1956  मंटो मेरा दुश्मन या मेरा दोस्त मेरा दुश्मन (उपेन्द्रनाथ अश्क)
1956  पथ के साथी (महादेवी
1957  जिनका मैं कृतज्ञ (राहुल सांकृत्यायन)
1957  वे जीते कैसे हैं (श्रीराम शर्मा)
1957  माटी हो गई सोना (कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर)
1958  दीप जले, शंख बजे (कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर)
1958  बाजे पायलिया के घुंघरू (कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर)
1959  रेखाचित्र (प्रेमनारायण टंडन)
1959  स्मृति-कण (सेठ गोविन्ददास)
1959  ज़्यादा अपनी कम परायी (अश्क)
1959  मैं इनका ऋणी हूं (इन्द्र विद्यावाचस्पती)
1960  प्रसाद और उनके समकालीन (विनोद शंकर व्यास)
1962  जाने-अनजाने (विष्णु प्रभाकर)
1962  कुछ स्मृतियां और स्फुट विचार (डॉ॰ सम्पूर्णानन्द)
1962  समय के पांव (माखनलाल चतुर्वेदी)
1962  नए-पुराने झरोखे (हरिवंशराय बच्चन)
1962  अतीत की परछाइयां (अमृता प्रीतम)
1963  दस तस्वीरें (जगदीशचन्द्र माथुर)
1963  साठ वर्ष : एक रेखांकन (सुमित्रानन्दन पन्त)
1963  जैसा हमने देखा (क्षेमचन्द्र सुमन)
1965  कुछ शब्द : कुछ रेखाएं (विष्णु प्रभाकर)
1965  मेरे हृदय देव (हरिभाऊ उपाध्याय)
1965  वे दिन वे लोग (शिवपूजन सहाय)
1965  जवाहर भाई : उनकी आत्मीयता और सहृदयता (रायकृष्ण दास)
1965  लोकदेव नेहरू (रामधारीसिंह दिनकर)
1966  विकृत रेखाएं : धुंधले चित्र (महेन्द्र भटनागर)
1966  स्मृतियां और कृतियां (शान्तिप्रय द्विवेदी)
1966  चेहरे जाने-पहचाने (सेठ गोविन्ददास)
1967  कुछ रेखाएं : कुछ चित्र (कुन्तल गोयल)
1967  चेतना के बिम्ब (डॉ॰ नगेन्द्र)
1968  बच्चन निकट से (अजित कुमार एवं ओंकारनाथ श्रीवास्तव)
1968  संस्मरण और विचार (काका साहेब कालेलकर)
1968  स्मृति के वातायन (जानकीवल्लभ शास्त्री)
1968  घेरे के भीतर और बाहर (डाॅ॰ हरगुलाल)
1969  संस्मरण और श्रद्धांजलियां (रामधारी सिंह दिनकर)
1969  चांद (पद्मिनी मेनन)
1970  व्यक्तित्व की झांकियां (लक्ष्मीनारायण सुधांशु)
1971  जिन्होंने जीना जाना (जगदीशचन्द्र माथुर)
1971  स्मारिका (महादेवी वर्मा)
1972  मेरा परिवार (महादेवी वर्मा)
1972   अन्तिम अध्याय (पदुमलाल पुन्नालाल बख़्शी)
1973   जिनके साथ जिया (अमृतलाल नागर)
1974   स्मृति की त्रिवेणिका (लक्ष्मी शंकर व्यास)
1975   चन्द सतरें और (अनीता राकेश)
1975  मेरा हमदम मेरा दोस्त (कमलेश्वर)
1975  रेखाएं और संस्मरण (क्षेमचन्द्र सुमन)
1976  बीती बातें (परिपूर्णानन्द)
1976  मैंने स्मृति के दीप जलाए (रामनाथ सुमन)
1977  मेरे क्रान्तिकारी साथी (भगतसिंह)
1977  हम हशमत (कृष्णा सोबती)
1978   संस्मरण को पाथेय बनने दो (विष्णुकान्त शास्त्री)
1978   कुछ ख़्वाबों में कुछ ख़यालों में (शंकर दयाल सिंह)
1979  अतीत के गर्त से (भगवतीचरण वर्मा)
1979  श्रद्धांजलि संस्मरण (मैथिलीशरण गुप्त)
1979  पुनः (सुलोचना रांगेय राघव)
1980  यादों के झरोखे (कुंवर सुरेश सिंह)
1980  लीक-अलीक (भारतभूषण अग्रवाल)
1981  यादों की तीर्थयात्रा (विष्णु प्रभाकर)
1981  औरों के बहाने (राजेन्द्र यादव)
1981   जिनके साथ जिया (अमृतलाल नागर)
1981   सृजन का सुख-दुख (प्रतिभा अग्रवाल)
1982  संस्मरणों के सुमन (रामकुमार वर्मा)
1982   स्मृति-लेखा (अज्ञेय)
1082   आदमी से आदमी तक (भीमसेन त्यागी)
1983   मेरे अग्रज : मेरे मीत (विष्णु प्रभाकर)
1983   युगपुरुष (रामेश्वर शुक्ल अंचल’)
1983  निराला जीवन और संघर्ष के मूर्तिमान रूप (डॉ॰ ये॰ पे॰ चेलीशेव)
1984  बन तुलसी की गन्ध (रेणु)
1984   दीवान ख़ाना (पद्मा सचदेव)
1986  रस गगन गुफा में (भगवतीशरण उपाध्याय)
1988  हज़ारीप्रसाद द्विवेदी : कुछ संस्मरण (कमल किशोर गोयनका)
1989   भारत भूषण अग्रवाल : कुछ यादें, कुछ चर्चाएं (बिन्दु अग्रवाल)
1990   सृजन के सेतु (विष्णु प्रभाकर)
1992   याद हो कि न याद हो (काशीनाथ सिंह)
1992   निकट मन में (अजित कुमार)
1992   जिनकी याद हमेशा रहेगी (अमृत राय)
1992   सुधियां उस चन्दन के वन की (विष्णुकान्त शास्त्री)
1994   लाहौर से लखनऊ तक (प्रकाशवती पाल)
1994   सप्तवर्णी (गिरिराज किशोर)
1995   लौट आ ओ धार (दूधनाथ सिंह)
1995   स्मृतियों के छंद (रामदरश मिश्र)
1995   मितवा घर (पदमा सचदेव)
1995   अग्निजीवी (प्रफुल्लचन्द्र ओझा)
1996   सृजन के सहयात्री (रवीन्द्र कालिया)
1996   अभिन्न (विष्णुचन्द्र शर्मा)
1998   यादें और बातें (बिन्दु अग्रवाल)
1998   हम हशमत (भाग-2, कृष्णा सोबती)
2000   अमराई (पदमा सचदेव)
2000   वे देवता नहीं हैं (राजेन्द्र यादव)
2000   यादों के काफिले (देवेन्द्र सत्यार्थी)
2000   नेपथ्य नायक लक्ष्मीचन्द्र जैन (मोहनकिशोर दीवान)
2000   याद आते हैं (रमानाथ अवस्थी)
2001   अपने-अपने रास्ते (रामदरश मिश्र)
2001  अंतरंग संस्मरणों में प्रसाद (सं॰ पुरुषोंत्तमदास मोदी)
2001  एक नाव के यात्री (विश्वनाथप्रसाद तिवारी)
2001  प्रदक्षिणा अपने समय की (नरेश मेहता)
2002   चिडि़या रैन बसेरा (विद्यानिवास मिश्र)
2002  लखनऊ मेरा लखनऊ (मनोहर श्याम जोशी)
2002  काशी का अस्सी (काशीनाथ सिंह)
2002   लौट कर आना नहीं होगा (कान्तिकुमार जैन)
2002  नेह के नाते अनेक (कृष्णविहारी मिश्र)
2002  स्मृतियों का शुक्ल पक्ष (डॉ॰ रामकमल राय)
2003  आंगन के वंदनवार (विवेकी राय)
2003  रघुवीर सहाय : रचनाओं के बहाने एक संस्मरण (मनोहर श्याम जोशी)
2004  तुम्हारा परसाई (कान्तिकुमार जैन)
2004  पर साथ-साथ चली रही याद विष्णुकान्त शास्त्री)
2004   नंगा तलाई का गांव (डॉ॰ विश्वनाथ त्रिपाठी)
2004   लाई हयात आए (लक्ष्मीधर मालवीय)
2004   आछे दिन पाछे गए (काशीनाथ सिंह)
2005   सुमिरन को बहानो (केशवचन्द्र वर्मा)
2005   मेरे सुहृद : मेरे श्रद्धेय (विवेकी राय)
2006   ये जो आईना है (मधुरेश)
2006   जो कहूंगा सच कहूंगा (डाॅ॰ कान्ति कुमार जैन)
2006   घर का जोगी जोगड़ा (काशीनाथ सिंह)
2007   एक दुनिया अपनी (डॉ॰ रामदरश मिश्र)
2007   अब तो बात फैल गई (कान्तिकुमार जैन)
2009   कुछ यादें : कुछ बातें (अमरकान्त)
2009   दिल्ली शहर दर शहर (डॉ॰ निर्मला जैन)
2009   कालातीत (मुद्राराक्षस)
2009   कितने शहरों में कितनी बार (ममता कालिया)
2009   हाशिए की इबारतें (चन्द्रकान्ता)
2009   मेरे भोजपत्र (चन्द्रकान्ता)
2009   कविवर बच्चन के साथ (अजीत कुमार)
2010   जे॰ एन॰ यू॰ में नामवर सिंह (सं॰ सुमन केशरी)
2010   अंधेरे में जुगनू (अजीत कुमार)
2010   बैकुंठ में बचपन (कान्तिकुमार जैन)
2010  अ से लेकर ह तक (यानी अज्ञेय से लेकर हृदयेश तक, डॉ॰ वीरेन्द्र सक्सेना)
2011   कल परसों बरसों (ममता कालिया)
2011   स्मृति में रहेंगे वे (शेखर जोशी)
2011   अतीत राग (नन्द चतुर्वेदी)
2012   स्मृतियों के गलियारे से (नरेन्द्र कोहली)
2012  गंगा स्नान करने चलोगे (डॉ॰ विश्वनाथ त्रिपाठी)
2012  आलोचक का आकाश (मधुरेश)
2012  माफ़ करना यार (बलराम)
2012  अपने-अपने अज्ञेय (दो खंड, ओम थानवी)
2012  यादों का सफ़र (प्रकाश मनु)
2012  हम हशमत (भाग-3, कृष्णा सोबती)
2013    मेरी यादों का पहाड़ )देवेंद्र मेवाड़ी(